खाताधारकों को बड़ी चेतावनी, Yes Bank के बाद अब स्टेट बैंक पर भी मंडराए संकट के बादल, निकला इतने हज़ार करोड़ का क़र्ज़

आर्थिक संकट से झूझ रहे यस बैंक की मदद के लिए जिस स्‍टेट बैंक ऑफ इंडिया ने हाथ बढ़ाया है, वह खुद भारी क़र्ज़ में डूबा हुआ है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों पीएसबी में किसी का भी एनपीए NPA-Non Performing Assets एसबीआई से कम ही है।

पिछले 5 साल में इसका डूबने वाला पैसा करीब 3 गुना बढ़ चुका है। 2014-15 में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया का डूबा कर्ज एनपीए 56738 करोड़ रुपये था जो अब बढ़कर 159661 करोड़ रुपये हो गया है। इसका मतलब साफ है कि अब स्टेट बैंक पर भी संकट के बादल दिख रहे हैं।

शनिवार 7 मार्च को एक प्रेस कांफ्रेंस में स्‍टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने कहा था कि, यस बैंक को संकट से निकालने के लिए केवल 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत है। उनका बैंक फिलहाल इसमें 2450 करोड़ रुपये निवेश करेगा।

स्टेट बैंक में विलय होने वाले बैंकों का डूबा कर्ज-स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में 6 बैंकों का विलय हुआ है। केंद्रीय वित्त मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार साल 2016-17 में स्टेट बैंक ऑफ हैदराबाद का कुल डूबा कर्ज 18212 करोड़ रुपये का हो गया था। जबकि स्टेट बैंक में विलय होने वाले स्टेट बैंक ऑफ पटियाला का 17847 करोड़ रुपये कर्ज डूबा था।

स्टेट बैंक ऑफ बीकानेर एंड जयपुर का 10677 करोड़, स्टेट बैंक ऑफ मैसूर का 9915 करोड़ रुपये और स्टेट बैंक ऑफ त्रावणकोर का 8817 करोड़ रुपये का एपीए था। विलय के वक्त भारतीय महिला बैंक में 55 करोड़ रुपये का एनपीए था।

पीएनबी का डूबा कर्ज भी तीन गुना बढ़ा-सरकारी क्षेत्र के दूसरे बड़े पंजाब नेशनल बैंक का भी डूबा कर्ज 3 गुना बढ़ गया है। 5 साल पहले 2014-15 में इसका एनपीए 25695 करोड़ रुपये था जो एक साल में दोगुना होकर 55 हजार करोड़ से ज्यादा हो गया था। 2019-20 में इसका डूबा कर्ज 76809 करोड़ रुपये हो गया है।

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