विवादित ज़मीन पर आदित्यनाथ ने जताई लाचारगी बोले- देश की जनता निकाले राम मंदिर निर्माण का हल

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उत्तर प्रदेश: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने कहा कि तमाम प्रमाण देने के बाद भी राम मंदिर निर्माण का फैसला करने में संकोच हो रहा है। इसका मतलब है कि इसमें प्रमाण नहीं कोई दूसरी बात है। इसका समाधान देश की जनता को ही निकालना होगा।

यह बातें उन्होंने रविवार को पतंजलि में उत्तराखंड उच्च शिक्षा मंत्रालय और पतंजलि विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित ज्ञानकुंभ के समापन सत्र में कहीं।योगी ने कहा कि क्या भारत में आस्था को प्रमाणित करना होगा। हमसे राम के बारे में प्रमाण मांगा जाता है। आस्था और परंपराओं के देश में इससे घटिया बात और क्या होगी।

हमने सभी प्रमाण दे भी दिए। फिर फैसले में देरी क्यों? योगी ने कहा कि दिवाली के दिन देश की जनता राम के नाम पर अलग से एक दिया जरूर जलाए। जिससे राम का काम आसान हो सके। कहा कि यूपी सरकार ने अयोध्या की परंपरा को दिवाली के साथ जोड़ा है।

पतंजलि विश्वविद्यालय के कुलाधिपति रामकृष्ण यादव उर्फ रामदेव ने राम मंदिर निर्माण को लेकर कहा कि लोग आदित्यनाथ से अपेक्षा करते हैं। बड़े प्रश्न हैं राष्ट्रीय स्तर पर। उनका समाधान जब हो तब हो। कोर्ट का निर्णय कब आए पता नहीं। बहुत प्रतीक्षा कर रहे हैं लोग। आदित्यनाथ से अपील करते हुए कहा कि उनके जितने भी सांसद हैं वो एक व्यक्तिगत बिल ला सकते हैं।

लोकतंत्र में सबसे बड़ा मंदिर संसद होता है। संसद से बड़ा कोई मंदिर नहीं होता। अयोध्या भगवान राम की भूमि है। इस पर अब कोई सवाल नहीं किया जाना चाहिए। भाजपा का विपक्ष हो सकता है। राजनीति में भी पक्ष-विपक्ष हो सकते हैं। भारत में राम का कोई विरोधी नहीं, बल्कि उन्हें अपना पूर्वज मानते हैं।

जब आदित्यनाथ के माध्यम से मोदी संसद में प्रस्ताव लाएंगे तो किसी की इतनी हिम्मत नहीं कि विरोध कर सके।

इस अवसर पर हिमाचल के उच्च शिक्षा मंत्री डॉ सुरेश भारद्वाज, उत्तराखंड विधानसभा अध्यक्ष प्रेम चंद अग्रवाल,
नेपाली नागरिक आचार्य बालकृष्ण,
यूजीसी अध्यक्ष प्रो. डीपी सिंह,
सुनील आम्बेडकर,
उत्तराखंड के उच्च शिक्षा मंत्री धन सिंह रावत,
अतुल कोठारी और अपर सचिव डॉ रणवीर सिंह आदि मौजूद रहे।
साभार-Sagar PaRvez

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