अलीगढ़ : 2006 में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने तथा आज़म की हत्या में पूर्व मेयर सहित तीन आरोपी बरी

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अलीगढ़: 2006 में हुए सांप्रदायिक दंगे भड़काने और हत्या के मामले में नामजद पूर्व मेयर शकुंतला भारती सहित तीन आरोपी गवाहों के मुकर जाने पर कोर्ट ने बरी कर दिया। आपको बतादे की 6 अप्रैल 2006 को अलीगढ के दही वाली गली में विवाद के बाद सांप्रदायिक हिंसा भड़क गयी थी। जिसमे पुलिस और पीएसी द्वारा की गयी फायरिंग में चार मुस्लिम युवकों की मौत फर्श इलाके में हुयी थी। इस हिंसा में दो दर्ज़न अन्य लोग घायल हुये थे।

2006 में हुए सांप्रदायिक दंगे के दौरान कथित तौर पर मो. आजम की कनवरीगंज फर्श में हुई हत्या में पूर्व मेयर शकुंतला भारती सहित तीन आरोपीयो को कोर्ट के गवाह के मुकर जाने पर बरी कर दिया। इस हत्या में आरोपी ओपी लाल की पहले ही मौत हो चुकी है। जबकि तीन आरोपी पहले ही बरी हो चुके हैं।

आपको बतादे की 5 अप्रैल 2006 को दुर्गा अष्टमी के दिन शाम को दही वाली गली स्थित मंदिर में पूजा के दौरान हुए विवाद ने अगले दिन शहर में सांप्रदायिक दंगे का रूप ले लिया था। जिसमे कनवरीगंज फर्श सहित कई जगहों पर पथराव-फायरिंग की घटनाएं सामने आयी थी। कनवरीगंज फर्श में अलग-अलग झड़पों में चार लोगों की मौत हुई थी। जिसमे से मो. आजम के भाई कासिम निवासी टीला चौकात ऊपरकोट ने आनंद, अमित, आलोक उर्फ शिवाजी, शकुंतला भारती, कैलाश, ओपी लाला और गुन्नी पहलवान उर्फ गणेश को नामजद किया था। जिसमे से ओपी लाल की बाद में मौत हो गयी।

सेशन टेस्टिंग के दौरान पहले ही अमित, आलोक व गुन्नी पहलवान को बरी कर दिया गया। इस मामले में खुद पूर्व मेयर शकुंतला भारती व उनके पूर्व अधिवक्ता शैलेंद्र अग्रवाल ने जानकारी देते हुए कहा की पुलिस ने विवेचना के दौरान मेरा आनंद और कैलाश का नाम निकाल दी थी।

जिसके बाद आजम के भाई ने हाईकोर्ट का रुख कर लिया और कोर्ट ने उन्हें फिर से तलब कर लिया। खुद पूर्व मेयर, आनंद व कैलाश के खिलाफ कोर्ट में मामला लंबित था। जिसमें अब एडीजे-5 की अदालत ने तीनों आरोपियों को गवाहों के बयान से मुकरने की वजह से उन्हें सोमवार को बरी कर दिया।

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