अमेरिका ने NRC को बताया मुस्लिमों को देश से बाहर करने का हथियार, मोदी सरकार हो सकती है बैन

अमेरिका में धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर चल रही संघीय संस्था USCIRF (United States Commission on International Religious Freedom) ने मोदी सरकार पर आरोप लगते हुए बताया कि असम में राष्ट्रीय नागरक रजिस्टर (NRC) धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने और मुस्लिमों को देश से बाहर करने का एक हथियार है। (United States Commission on International Religious Freedom) ने कहा कि कई घरेलू और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं ने इस मामले में चिंता जाहिर की है।

USCIRF दवारा “इशू ब्रीफ इंडिया” में एक रिपोर्ट जारी की जिसमें बताया गया कि एनआरसी “धार्मिक अल्पसंख्यकों को निशाना बनाने का एक जरिया है और विशेषकर भारतीय मुस्लिमों को राज्यविहीन करना, भारत के भीतर धार्मिक स्वतंत्रता की स्थितियों में गिरावट का एक और उदाहरण है।” रिपोर्ट में बताया गया कि अगस्त 2019 में एनआरसी की सूची जारी करने के बाद बीजेपी सरकार के इस कदम ने उसके मुस्लिम विरोध और पक्षपातपूर्ण रवैये को जगजाहिर किया है।

(United States Commission on International Religious Freedom) का कहना है कि सत्तारूढ़ बीजेपी सरकार अन्य राज्यों, विशेष रूप से महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल में नागरिकों के डेटाबेस के कार्यान्वयन पर काफी जोर दिया है। अमेरिकी आयोग ने बताया कि कई “गरीब परिवारों” के लिए जरूरी दस्तवेज को पेश करना, निपक्षरता, सरकारी कार्यालयों तक जाने के लिए पैसे की कमी और कानूनी रूप से चुनौती देने में अक्षमता जैसी बड़ी रुकावटें थीं। लोगों को कागजी कार्रवाई के दौरान मामूली विसंगतियों के चलते नागरिक रजिस्टर से दूर रख दिया गया। ऐसे मामले कई थे, जिनमें नाम की वर्तनी में अंतर पर उन्हें सूची से दूर रखा गया।

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