‘Yes बैंक’ बनने की कतार में, एक और 93 साल पुराना बैंक, कही आपका इसमें खाता तो नहीं

लक्ष्मी विलास बैंक का 23.3 पर्सेंट ग्रॉस एनपीए है जो IDBI के बाद सबसे अधिक है, IDBI में LIC का टेका लगा है जिसकी वजह से वह बचा हुआ है। लेकिन लक्ष्मी विलास बैंक के साथ ऐसा कोई बड़ा निवेशक अभी तक नही जुट पाया है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बीते साल लक्ष्मी विलास बैंक पर कड़ी कार्रवाई करते हुए प्रॉम्प्ट करेक्टिव एक्शन (PCA) फ्रेमवर्क में डाल दिया था, आरबीआई दवारा किसी भी बैंक को पीसीए फ्रेमवर्क में तब डालता है जब लगता है कि बैंक की आय नहीं हो रही है या फिर नॉन परफॉर्मिंग एसेट यानी एनपीए बढ़ रहा है।

सबसे ज़रूरी बात ये है कि, लक्ष्मी विलास बैंक का कैपिटल एडिक्वेसी रेशियो (CAR) मिनिमम रिक्वायरमेंट से काफी नीचे आ गया है। लक्ष्मी विलास बैंक का कैपिटल एडेक्वेसी रेशियो सिर्फ 3.46 फीसदी है जबकि कम से कम 9 फीसदी रहना अनिवार्य होता है। CAR बैंक की पूंजी को मापने का एक तरीका होता है. यह वास्तव में बैंक की जोखिम वाली पूंजी का फीसदी बताता है। लक्ष्मी विलास बैंक ओर इंडियाबुल्स का मर्जर होने वाला था अप्रैल 2019 में लक्ष्मी विलास बैंक ने इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनेंस के साथ विलय की घोषणा की भी कर दी थी लेकिन रिजर्व बैंक ने अंतिम समय में मना कर दिया।

फिलहाल लक्ष्मी विलास बैंक ने विदेशी निवेशकों से 2,200 करोड़ रुपये जुटाने की योजना के साथ रिजर्व बैंक से संपर्क किया है। सूत्रों दवारा मिली जानकारी अनुसार, योजना के हिसाब से वह इतनी रकम के लिए 49-60% हिस्सेदारी बेच सकता है। ओर उसकी कई बैंको के साथ बात भी चल रही है इन निवेशकों में कोटक बैंक भी शामिल है। अगर रिजर्व बैंक ने समय रहते कदम नही उठाए तो लक्ष्मी विलास बैंक भी यस बैंक के राह पर चल देगा फिर उसके लिए निवेशक रिजर्व बैंक को ही जुटाने होंगे।

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