योगी सरकार की पुलिस कारसेवकों की भूमिका में घंटाघर के आंदोलनकारियों पर हुई हमलावर- रिहाई मंच

लखनऊ, 4 मार्च 2020। रिहाई मंच ने लखनऊ घंटाघर पर महिला प्रदर्शनकारियों के साथ पुलिस द्वारा की जाने वाली अभद्रता, मारपीट और वॉलंटियर्स की गिरफ्तारी को प्रदेश सरकार के इशारे की गई की गई दमनात्मक कार्रवाई बताया। धरना स्थल पर बाबा साहेब अंबेडकर और महात्मा गांधी के पोट्रेट स्टैंडी पर पुलिस के हमले में बाबा साहेब के हाथ, सर व गांधी जी के पैर को तोड़ने की घटना को मनुवादी हमला करार देते हुए कहा कि पुलिस कारसेवको की भूमिका में है।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि 3-4 मार्च की रात में करीब एक बजे बड़ी संख्या में यूपी पुलिस के जवानों ने घंटाघर पर शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन कर रही महिलाओं को गालियां देते हुए लाठियां भांजी जिसमें कुछ महिलाएं घायल हो गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस वाले बल प्रयोग के साथ ही महिलाओं को भद्दी-भद्दी गालियां दे रहे थे और धरना समाप्त करने के लिए धमका रहे थे।

महिलाओं ने उनका प्रतिरोध किया और वहां पर मौजूद वॉलंटियर्स ने जब उसमें हस्तक्षेप किया तो पुलिस ने यामीन खान, शान मोहम्मद समेत कई वॉलंटियर्स को उठा ले गयी। उन्होंने कहा कि दो-तीन दिनों से लगातार देर रात में पुलिस प्रदर्शन स्थल पर आती थी और वहां मौजूद किसी भी पुरूष को उठा ले जाती थी।

रिहाई मंच अध्यक्ष ने कहा कि पुलिस उत्तर प्रदेश सरकार के इशारे पर हर हालत में महिलाओं के विरोध प्रदर्शन को खत्म करवाने पर आमादा है और दिल्ली के तर्ज पर लखनऊ में भी वह गुंडों का सहारा ले रही है। उन्होंने बताया कि आज दिन में करीब तीन बजे नशे में धुत संघ–भाजपा से जुड़े कुछ गुंडे धरना स्थल पर पहुंचे और महिलाओं को संकेत कर गालियां देने लगे।

जब वे धरने के बिल्कुल करीब आ गए तो वॉलंटियर्स ने उनमें से एक को पकड़ लिया। जब महिलाएं उस गुंडे को पुलिस को सौंप रही थीं तो पुलिस वालों ने गुंडों को कुछ कहने के बजाए महिलाओं को पीटना शुरू कर दिया जिसमें उनके प्रावेट पार्ट्स को निशाना बनाकर चोट पहुंचाई और कुछ वालंटियर्स को पकड़ कर ले गए। उन्होंने आरोप लगाया कि हमलावर गुंडों को भी पुलिस अपने साथ ले गई लेकिन उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई। 

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