अयोध्या विवाद: मोदी सरकार ने चला दाव- विवादित स्थल के अलावा जमीन वापस देने के लिए SC में डाली याचिका

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नई दिल्ली: राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले में उच्च न्यायालय द्वारा हो रही सुनवाई में देरी को लेकर अब मोदी सरकार ने दूसरा रास्ता निकाला है। मंगलवार 29 जनवरी को मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर कर विवादित जमीन के अलावा बाकी जमीन ‘राम जन्मभूमि न्यास’ को लौटाने की माँग की है।

मोदी सरकार का सुप्रीम कोर्ट से कहना है की विवादित जगह के पास मौजूद 67 एकड़ जमीन पर से स्टे हटाकर राम जन्मभूमि न्यास सहित बाकि अन्य असली मालिकों को सौंप दे। बतादे की 1993 में बाबरी मस्जिद विध्वंस के बाद केंद्र सरकार ने इस जमीन को अपने कब्जे में लिया था। वही सुप्रीम कोर्ट ने 1994 में राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामले पर सुनवाई करते हुए कहा था की जब तक विवादित जगह पर फैसला नहीं आ जाता। तब तक यह जमीने केंद्र सरकार के पास मौजूद रहेगी।

लेकिन अब केंद्र सरकार केवल 0.3 एकड़ जमीन ही अपने पास रखना चाहती है। जबकि विवादित जमीन के अलावा बाकी जमीन ‘राम जन्मभूमि न्यास’ सहित बाकि अन्य असली मालिकों को सौंप देना चाहती है। केंद्र सरकार के इस फैसले पर विश्व हिंदू परिषद (विहिप) ने ख़ुशी जाहिर करते हुए कहा की मोदी सरकार ने सही दिशा में अपना कदम बढ़ाया है।

गौरतलब है कि मोदी सरकार ने यह फैसला सुनवाई में हो रही देरी तथा हिंदू संगठनों द्वारा बढ़ते दबाव के चलते लिया है। आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत भी कई बार राम मंदिर निर्माण में हो रही देरी पर अपनी बात कह चुके है। मोहन भागवत ने तो फैसले में हो रही देरी पर ऑर्डिनेंस लाने की माँग की थी। आपको बतादे की इस मामले पर 29 जनवरी को सुनवाई होनी थी लेकिन सीजेआई द्वारा गठित 5 सदस्यीय संविधान पीठ के जस्टिस एसए बोबडे किसी कारण से उपलब्ध नहीं हो सके जिसके चलते सुनवाई टालनी पड़ी।

इस दौरान केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा था की सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में सुनवाई बिना कोई देरी के होनी चाहिए। जनसत्ता के अनुसार केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के अनुसार मामला पिछले 70 सालों से विचाराधीन है। इस मामले पर इलाहाबाद हाई कोर्ट अपना फैसला सुना चुकी है लेकिन सुप्रीम कोर्ट इस मामले पर फैसला देने में विलंब कर रही है।

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