संक्रमण से डरे हुए हैं बैंकर, स्वास्थ्य मंत्रालय को इनके लिए भी दिशानिर्देश जारी करने चाहिए

बैंकरों की चिन्ता जायज़ है। उनके काउंटर के आगे लंबी लाइन लग जा रही है। लाइन में ग्राहक एक दूसरे के करीब रहते हैं। नोट के ज़रिए उन तक संक्रमण आ सकता है और कोई सशरीर आ कर वहां कोरोना कणों को वितरित कर सकता है। बैंकर चाहते हैं कि उनकी आवाज़ उठाई जाए। बीस पचीस लाख लोगों का यह समूह है। राजनीति के धार्मिकरण ने जब से नागरिक बोध को खत्म किया है इस पेशे की आवाज़ अब सामूहिक नहीं रही। वर्ना ये कोई बड़ी बात नहीं थी कि अपने लिए सुरक्षा के उपकरण वे हासिल नहीं कर सकते थे।

फिर भी स्वास्थ्य मंत्रालय को बैंकों के प्रमुखों को निर्देश देना चाहिए कि वे कैशियर से लेकर बैंक के मैनेजर तक को सैनिटाइज़र से लेकर सामाजिक दूरी की सुविधा मुहैया कराएं। कुछ शाखाओं में मैनेजरों ने सामाजिक दूरी के तरीके तो अपना लिए हैं मगर आदेश की अपनी भूमिका होती है। आदेश आने से सार्वजनिक रूप से बैंकरों के योगदान को स्वीकृति मिल जाती है। इस वक्त उनका भी योगदान अहम तो है ही।

बैंकरों को भी मास्क से लेकर गाउन मिलने चाहिए। कैशियर काउंटर पर नीचे बैठा होता है। ग्राहक खड़ा रहता है। छींक दिया तो कोरोना कण उसके बाल से लेकर कंधे तक पर अपना ठिकाना बना लेंगे। इसलिए बैंकरों की समस्या को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। मीडिया के पास अब इन चीज़ों के लिए वक्त नहीं है। ये मैं बैंकरों को पहले ही बता दिया हूं। अगर उनकी समस्या नहीं दिखाने पर भी बैंक के लोग चैनल देखते हैं और उसके लिए पैसे देते हैं तो मेरे ख्याल से चैनल वालों का बिजनेस सेंस अच्छा है। जब ग्राहक की समझदार न हो तो दुकानदार को हमेशा दोष देना ठीक नहीं।

फिर भी यह इतना बड़ा मसला नहीं है कि बैंकर इसका समाधान नहीं निकलवा सकते हैं। सरकार को भी समझना चाहिए कि उनके बीच संक्रमण फैला तो उसी पर दबाव आएगा। तो बेहतर है कि सभी मिलकर समाधान निकालें।

बैंकरों को भी एक बात समझनी होगी कि सरकार इस वक्त ग़रीब लोगों के खाते में पैसा देगी। यह उसका काम है और ऐसा कर सरकार ने अच्छा काम किया है। अब ग़रीब लोग पैसा लेने आएंगे ही। आ भी रहे हैं तभी बैंकों के बाहर भीड़ बढ़ गई है। जैसा कि कई बैंकरों ने तस्वीर भेज कर दिखाने का प्रयास कर रहा है। तो इस भीड़ का विकल्प निकाला जा सकता है।

ज़िला प्रशासन चाहे तो पुलिस लगा कर वहां पर लाइन बनवा दे। एक दो बार लाइन बन जाएगी उसके बाद लोग खुद ही लाइन का पालन करने लगेंगे। बैंकर काम पर आ रहे हैं। यह अच्छी बात है। लेकिन भीड़ को कोई कैशियर मैनेज नहीं कर सकता है। इसमें प्रशासन की दखल ज़रूरी है। बैंकों में ग़रीब लोगों का आना जारी रहेगा और इसे सरकार नहीं बंद कर सकती है। हां बैंकरों को बेहतर सुरक्षा के उपकरण ज़रूर दे सकती है और देनी भी चाहिए। (रविश कुमार)

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