एलआईसी में पैसे लगाने वाले सावधान, सबके पैसे खतरे में, कंपनी के फंसे 30000 करोड़ रूपए

एलआईसी में जमा हुए आपके पैसे पर जोखिम बढ़ता दिखाई दे रहा है, एनपीए 5 साल में बढ़कर 30000 करोड़ पहुंच चुका है। भारतीय जीवन बीमा निगम को भरोसे का प्रतीक माना जाता है। क्युकी वह एक सरकारी बीमा कंपनी है, लेकिन अब एलआईसी पर खतरा मंडरा रहा है। बहुत लोग आंख मूंदकर अपनी गाढ़ी कमाई का बड़ा हिस्सा एलआईसी की योजनाओं में लगाते हैं। लेकिन कुछ वर्षों की कई घटनाएं इस ओर संकेत कर रही हैं कि एलआईसी के पास मौजूद नकदी के बड़े भंडार पर खतरा बढ़ रहा है। एलआईसी अपने नकदी के भंडार के चलते सरकार के लिए भी संकटमोचन का काम करती है। इसने सार्वजनिक कंपनियों और बैंकों के शेयर खरीद कर उनको बचाने का काम किया है।एलआईसी के नवीनतम बहीखाता देखने से कई चौंकाने वाली जानकारी मिली है। एलआईसी भी वही गलती करती दिख रही है, जैसा निजी क्षेत्र को हजारों करोड़ के लोन बांटकर सार्वजनिक बैंकों ने किया है।

2019-20 के पहले छह महीने (अप्रैल-सितंबर) में एलआईसी की गैर निष्पादित संपत्त‍ि यानी NPA में 6.10 फीसदी की बढ़त हुई है। यह एनपीए निजी क्षेत्र के यस बैंक, आईसीआईसीआई, एक्सिस बैंक के करीब ही है। ये निजी बैंक बढ़ते एनपीए से परेशान दिखाई दे रहे हैं।

टर्म लोन और नॉन-कन्वर्ट‍िबल डिबेंचर के रूप में एलआईसी ने कई कॉरपोरेट कंपनियों को लोन दिए है। एलआईसी के पास 36 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति और नकदी है। 30 सितंबर, 2019 तक एलआईसी का एनपीए बढ़कर 30,000 करोड़ रुपये तक चला गया है। पिछले पांच साल में एनपीए में दुगनी बढ़त हुई है और यह कुल एसेट का 6.10 फीसदी हो गया है। एलआईसी की पहले गैर निष्पादित संपत्त‍ि 1.5 से 2 फीसदी तक रही है। तमाम प्रतिस्पर्धा के बावजूद एलआईसी अभी काफी मजबूत है और करीब दो-तिहाई प्रीमियम में इसकी साजेदारी है।

Check Also

अनलॉक 2: क्या खुलेगा, क्या रहेगा बंद, यहाँ जाने खुलकर

नई दिल्ली: मोदी सरकार ने अनलॉक-2 के लिए नई गाइडलाइन्स जारी कर दी है। जिसमे …