अमित शाह के इशारे पर जामिया में चलाई जा रही हैं गोलियां- रिहाई मंच

लखनऊ, रिहाई मंच ने जामिया में पुलिस द्वारा छात्रों पर गोली चलाने के लिए अमित शाह को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराते हुए तत्काल जामिया विश्वविद्यालय और एएमयू परिसर से पुलिस को हटाने की मांग की। मंच ने कहा की पुलिस की गोलीबारी में मौत की खबर आ रही है जो साफ़ करता है की सीधे तौर पर सरकार हत्या पर उतारू हो गई है। रिहाई मंच ने शिब्ली नेशनल कॉलेज आज़मगढ़ में देश विरोधी आज़ादी का नारा लगाए जाने की खबरों को भ्रामक और साम्प्रदायिक ताकतों द्वारा गोदी मीडिया के साथ मिलकर की गई अपराधिक साज़िश बताया है।

रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि जामिया विश्वविद्यालय में चल रहे आन्दोलन का दमन करने के लिए पुलिस ने खुद आगजनी की। भाजपा के सत्ता में आने के बाद से अपने आलोचकों का मुंह बंद करने और विरोध के स्वर का दमन करने के लिए देशद्रोही, पाकिस्तानी या हिंदू विरोधी का लेबल लगाती रही है। शिक्षण संस्थानों में आज़ादी का नारा लगाए जाने का आरोप भी इसी हिंदुत्वादी अभियान का हिस्सा है।

उन्होंने कहा कि जब जेएनयू से सरकार की जन विरोधी नीतियों के खिलाफ आवाज़ उठी तो वहां पाकिस्तान के समर्थन में आज़ादी का नारा लगाने का आरोप मढ़कर सरकार ने कई छात्र नेताओं को गिरफ्तार किया और सरकारी संरक्षण प्राप्त हिंदुत्ववादी संगठनों के माध्यम से उनके ऊपर अदालतों में हमले भी किए गए। इस अभियान को आगे बढ़ाते हुए साम्प्रदायिक ताकतों ने हैदराबाद विश्वविद्यालय, जाधवपुर विश्वविद्यालय पश्चिम बंगाल, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय, जामिया मिल्लिया को भी आज़ादी का नारा लगाने का आरोप लगाकर बदनाम करने की कोशिश की।

जेएनयू मामले में बार-बार सबूतों की बात करने वाली दिल्ली पुलिस देश विरोधी आज़ादी के नारों का कोई साक्ष्य नहीं जुटा सकी नतीजे के तौर पर एफआईआर दर्ज करने के बावजूद न्यायालय में आरोप पत्र नहीं दाखिल कर पाई। दरअसल देश विरोधी आज़ादी के नारे का इस्तेमाल सरकार विरोध के स्वर और आंदोलनों का दमन के लिए कर रही है। मुहम्मद शुऐब ने कहा कि मनुवाद, छुआछूत, भेदभाव, गरीबी, दमन आदि से आज़ादी या मुक्ति के नारे लगते रहे हैं। इन सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज़ बुलंद करने वालों को प्रोत्साहित करने के बजाए सरकार और प्रशासन झूठ के सहारे देश विरोधी आज़ादी का नारा बताने में लगी है। हालांकि, भाजपा ने स्वंय काँग्रेस और राजनीति के परिवारवाद से मुक्ति (आज़ादी) का नारा दिया था। उन्होंने कहा कि शिब्ली नेशनल कालेज के छात्रों पर आज़ादी का नारा लगाने के आरोप के पीछे विभाजनकारी नागरिकता विधेयक के खिलाफ उठने वाली आवाज़ के दमन के अलावा कुछ भी नहीं है।

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