नागरिकता संशोधन कानून पर नोटिफिकेशन लाकर सरकार ने एक बार फिर साबित किया कि वो संविधान विरोधी है- रिहाई मंच

लखनऊ 11 जनवरी 2020। देश में व्यापक विरोध के बावजूद सरकार ने गैरसंवैधानिक नागरिकता संशोधन कानून पर नोटिफिकेशन लाकर साफ कर दिया है कि वह जनता की भावनाओं और संविधान की परवाह नहीं करती।

नागरिकता संशोधन कानून 2019 का पूरे देश में लगातार भारी विरोध हो रहा है। इस काले कानून ने यूपी में ही तकरीबन 26 लोगों की जान ले ली है। लेकिन कल 10 जनवरी को गृह मंत्रालय ने इस काले कानून को अमल में लाने की अधिसूचना जारी कर इस बात पर मुहर लगा दी कि इस सरकार में जनता की बिल्कुल नहीं सुनी जायेगी। दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में विरोध करने की आज़ादी ही छीनी जा रही है।

वकील, लेखक, पत्रकार, पूर्व अधिकारियों, शिक्षकों, छात्रों, बच्चों, बूढों समेत आम लोगों पर पुलिस ने जो बर्बरता दिखायी है उससे लोकतांत्रिक देश का भ्रम टूटता नज़र आ रहा है। इतना ही नहीं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सरकार द्वारा जनता पर किये जा रहे अत्याचारों की गूंज सुनाई देनी लगी है। ये दमन अंग्रेज़ी दौर की भी याद दिलाता है।

शाहीन बाग, कानपुर की महिलाओं से लेकर पूरे भारत में महिलाएं जो अपना विरोध दर्ज करा रही हैं इस सरकार ने उनके विरोध को दरकिनार कर ये साबित कर दिया कि ‘बेटी पढाओ-बेटी बचाओ’ से लेकर ‘सबका साथ सबका विकास’ के नारे सिर्फ दिखावा हैं। यह सरकार तानाशाही रवैया अपनाकर इस काले कानून पर तुगलक़ी फरमान जारी कर रही है।

इतना ही नहीं गैर संवैधानिक नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ देश के बहुत से सामाजिक, मानवाधिकार संगठन और राजनीतिक दलों ने माननीय उच्चतम न्यायलय में अपनी आपत्ति दर्ज कराई है जिसकी सुनवाई 22 जनवरी को होनी है। इसके बाद भी मौजूदा सरकार लगातार इस गैर संवैधानिक कानून को आगे बढ़ाती जा रही है।

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