14 अरब स्मारक घोटाले में मायावती के खिलाफ नहीं होगी CBI-SIT जांच- इलाहाबाद हाईकोर्ट

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उत्तर प्रदेश: लखनऊ तथा नोएडा में हुये 14 अरब स्मारक घोटाले में बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष मायावती को शुक्रवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी राहत मिली है। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्मारक घोटाले की जांच CBI या SIT से कराए जाने की मांग वाली जनहित याचिका को यह कहते हुये ख़ारिज कर दिया की न ही इस घोटाले में राज्य सरकार को दिलचस्पी और न ही जनता दिलचस्पी ले रही है। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा की जिस मांग को लेकर जनहित याचिका दायर की गयी है उसमे जनता की दिलचस्पी नहीं है। इस मामले में सबसे हैरान करने वाली बात ये रही की योगी सरकार ही घोटाले को उजागर करने वाली याचिका को खारिज किये जाने की सिफारिश की है।

आपको बतादे की तत्कालीन लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने 14 अरब रूपये से अधिक की सरकारी खजाने के दुरूपयोग की बात कहते हुए गहन जांच सीबीआई या एसआईटी से कराए जाने की सिफारिश की थी। एबीपी न्यूज़ के अनुसार राज्य सरकार की संस्तुति पर ही इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में CBI या SIT जांच का आदेश दिए जाने की मांग को लेकर दाखिल की गई याचिका खारिज कर दिया। योगी सरकार ने कोर्ट को भरोसा दिलाया है की घोटाले की जांच विजिलेंस तेजी से कर रही है और जल्द ही इसे पूरा कर लिया जाएगा।

आपको बतादे की लोकायुक्त एनके मेहरोत्रा ने अपनी रिपोर्ट में कहा था की सबसे ज्यादा घोटाला पत्थर लाने और उन्हें तराशने के काम में हुआ है। जांच में पता चला की ट्रकों के नंबर दो पहिया वाहनों के निकले थे। इसके अलावा फर्जी कंपनियों के नाम पर भी करोड़ों रूपये हजम कर लिए गए। लोकायुक्त ने 20 मई 2013 को सौंपी गई अपनी रिपोर्ट में 14 अरब, 10 करोड़, 83 लाख, 43 हजार का घोटाला होने का जिक्र किया है। मेहरोत्रा की जाँच रिपोर्ट में कुल 199 लोगों को आरोपी पाया गया था। इन 199 लोगो में शामिल मायावती सरकार में कैबिनेट मंत्री रहे नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा के साथ ही कई विधायक और अनेक विभागों के बड़े अफसर भी थे।

इस घोटाले पर पूर्व की समाजवादी सरकार भी खासा ध्यान नहीं दी। लोकायुक्त की सिफारिश को नजरअंदाज करके जाँच CBI और SIT से न कराकर सूबे के विजिलेंस विभाग को सौंप दी थी। इस मामले में विजिलेंस टीम 1 जनवरी 2014 को गोमती नगर थाने में नसीमुद्दीन सिद्दीकी और बाबू सिंह कुशवाहा समेत 19 लोगो पर नामजद और अन्य अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर अपनी जाँच शुरू की थी। क्राइम नंबर 1/2014 पर दर्ज हुई FIR में IPC की धारा 120 B और 409 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की गई थी।

गौरतलब है की साल 2007 से 2012 तक मायावती ने अपने शासन-काल में नोएडा और लखनऊ में अम्बेडकर स्मारक परिवर्तन स्थल, स्मारक स्थल, गौतमबुद्ध उपवन, नोएडा का अम्बेडकर पार्क, मान्यवर कांशीराम, रमाबाई अम्बेडकर मैदान,ईको पार्क और स्मृति उपवन सहित पत्थरों के कई स्मारक बनवाये थे। इन स्मारकों पर उस समय सरकारी खजाने से 41 अरब 48 करोड़ रूपये खर्च किये गए थे।
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