CJI एस.ऐ.बोबडे ने कहा, न्यायालय दंगे नहीं रुकवा सकता, कोर्ट दंगे होने के बाद ही एक्शन ले सकता है

राजधानी दिल्ली में हुए दंगों में दर्जनों मासूमों की जान गई, फिर चाहे वो हिन्दू हो या मुस्लिम उनकी संपत्ति बर्बाद हुई। लेकिन देश के पीएम को सिर्फ अपने ट्विटर अकॉउंट की ज़्यादा चिंता है। उसके बाद अब पीड़ितों को न्याय की उम्मीद केवल न्यायलय से रह जाती है। लेकिन सर्वोच्च न्यायलय के सर्वोच्च न्यायाधीश का कहना है कि, वो दंगें नहीं रुकवा सकते हैं। अब सवाल उठता है कि आखिर जनता किसपर भरोसा रखे? क्या सुप्रीम कोर्ट भड़काऊ भाषण देने वाले नेताओं पर भी कार्यवाई के आदेश नहीं दे सकता?

दरअसल, दिल्ली में दंगा भड़काने के आरोपी भाजपा नेताओं के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करने के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार हो गया है। जिसकी सुनवाई बुधवार को होगी। याचिकाकर्ता हैश मंदर समेत दंगे के पीड़ितों की तरफ से ये केस वकील कॉलिन गोंसाल्वेस केस लड़ रहे हैं। जिनकी मांग है कि भड़काऊ भाषण देने वाले बीजेपी कपिल मिश्रा, प्रवेश वर्मा, अनुराग ठाकुर और अन्य नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज होनी चाहिए।

CJI एस.ऐ.बोबडे ने कहा कि, न्यायालय कभी दंगे नहीं रुकवा पाया है, न्यायालय दंगे नहीं रुकवा सकता। उन्होंने कहा कि “हम ये नहीं कह रहे कि लोगों को मरना चाहिए, हम अमन चाहते हैं लेकिन हमारी भी सीमाएँ है।” उनका कहना है कि कोर्ट केवल दंगे होने के बाद ही कुछ एक्शन ले सकता है।

न्यायालय ना तो गुजरात दंगे रुकवा पाया था, ना वो मुज़्ज़फरपुर दंगे और ना ही दिल्ली में हुए दंगे। लेकिन न्यायालय का काम न्याय देना भी होता है और किसी के साथ हो रहे अन्याय को रोकना भी। जब दिल्ली दंगों के पहले ही कपिल मिश्रा और उनकी पार्टी के तमाम नेताओं के भड़काऊ भाषण मीडिया में देखे जा रहे थे, तब न्यायालय दवारा एक्शन क्यों नहीं लिया?

जब जस्टिस मुरलीधर ने दिल्ली पुलिस से बीजेपी नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने के फैसले पर 24 घंटे के अंदर जवाब माँगा था तो उनका ट्रांसफर क्यों कर दिया गया? जब दोबारा सुनवाई हुई तो मामले को 4 हफ़्तों के लिए क्यों टाल दिया गया? क्या सुप्रीम कोर्ट बीजेपी नेताओं के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश देगा, या फिर ये भी उनकी सीमाओं से बाहर है?

Check Also

चीन से होगी आज अहम बातचीत, TikTok सहित 59 ऐप्‍स बैन लेकिन PAYTM, VIVO, OPPO बैन क्यों नहीं

प्रधानमंत्री आज देश को छठी बार संबोधित करने वाले हैं, जानिए कि चीन की 59 …