कोरोना संकट: रमज़ान की तरावीह को लेकर बड़ा फैसला, अगर कोई भी मुस्लिम मस्जिद में दिखाई दिया तो उसे…

23 या 24 अप्रैल में रमज़ान का चाँद दिखाई दे सकता है, और चांद दिखने के बाद ही तरावीह शुरु हो जाती हैं। लेकिन देश के हालत को देखते हुए अल्पसंख्यक कार्य मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने गुरुवार को इस संबंध में एक बैठक की। इस बैठक में 30 से ज़्यादा राज्य वक्फ बोर्डों के चेयरमैन भी शामिल हुए। यह बैठक वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग से हुई।

इस बैठक में देश में लॉकडाउन के चलते तराबीह की नमाज घरों पर ही पढ़ने का फैसला लिया गया। साथ ही तरावीह के चलते लॉकडाउन तोड़ने वालों पर कार्रवाई की बात भी कही गई। अगर किसी मस्जिद में तराबही पढ़ी जाएंगी वहां के मुतावल्ली पर राज्य वक्फ बोर्ड कार्रवाई करेगा। भारत में करीब 7 लाख से ज़्यादा पंजीकृत मस्जिदें, ईदगाह, दरगाह, इमामबाड़े और दूसरे धार्मिक-सामाजिक स्थल हैं।

सेंट्रल वक्फ कौंसिल के चेयरमैन मुख्तार अब्बास नकवी ने कहा कि, क्वारंटाइन, आइसोलेशन सेंटरों को लेकर अफवाहें फैलाई जा रही हैं, हमे मिलकर अफवाहों को रोकना चाहिए, लोगों में जागरूकता पैदा करनी चाहिए, हमें बताना चाहिए कि ऐसे केंद्र, लोगों को, उनके परिवार और समाज को किसी भी तरह के संक्रमण से सुरक्षित करने के लिए बनाए गए हैं. नकवी ने कहा कि कहा कि हमें स्वास्थ्य कर्मियों, सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों, सफाई कर्मचारियों से सहयोग करना चाहिए, वे अपनी जान हथेली पर लेकर हमारे स्वास्थ्य-सुरक्षा के लिए काम कर रहे हैं.

मुस्लिम धर्मगुरुओं ने बताया कि, हालात को देखते हुए लॉकडाउन की मियाद बढ़ाई जा चुकी है. पीएम नरेन्द्र मोदी और सीएम अरविंद केजरीवाल मियाद बढ़ाए जाने का पहले ही इशारा दे चुके थे. धर्मगुरुओं का कहना है कि इसे देखते हुए सभी मुसलमान अपने घरों में ही तरावीह पढ़ें. मस्जिद में सिर्फ वही लोग तरावीह पढ़ेंगे जो इस वक्त पांचों वक्त की नमाज़ पढ़ रहे हैं।

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