Cricket Australia taken big step and impose ban on Australia players for doing ads in IPL 2021 Indian premier league

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क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया ने इंडियन प्रीमियर लीग के 14वें  की शुरुआत से पहले बड़ा कदम उठाते हुए आईपीएल फ्रेंचाइजियों को हिदायत दी है कि वह ऑस्ट्रेलिया के प्लेयर्स का इस्तेमाल किसी भी एड में ना करें। आईपीएल 2021 में ऑस्ट्रेलिया के कुल 19 खिलाड़ी हिस्सा लेने वाले हैं, जिसमें ग्लेन मैक्सवेल, स्टीव स्मिथ जैसे बड़े नाम भी शामिल हैं। आईपीएल 2021 की नीलामी में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर ने मैक्सवेल को 14.25 करोड़ में खरीदा था, जबकि झाय रिचर्ड्सन को पंजाब किंग्स ने 14 करोड़ खर्च करके अपनी टीम में शामिल किया है। 

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भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) ने हाल ही में जारी एक एडवाइजरी  में क्रिकेट ऑस्ट्रेलिया का हवाला देते हुए कहा,”पूरी टीम की तस्वीर  केवल संबंधित आईपीएल फ्रेंचाइजियों के स्पॉन्सर की ओर से प्रिंट मीडिया में इस्तेमाल की जा सकती है। ऐसी कोई भी तस्वीर शराब, फास्ट फूड, रेस्तरां, तंबाकू और ऑनलाइन गेमिंग साइटों से संबंधित व्यापारिक कंपनियों के एड के  लिए इस्तेमाल नहीं होनी चाहिए। इससे हट कर किसी विज्ञापन अभियान में बिग  बैश लीग (बीबीएल) और ऑस्ट्रेलिया की राज्य टीम के एक से अधिक खिलाड़ी को  शामिल नहीं किया जाना चाहिए। इससे हट कर किसी एड अभियान में बिग  बैश लीग (बीबीएल) और ऑस्ट्रेलिया की राज्य टीम के एक से अधिक खिलाड़ी को  शामिल नहीं किया जाना चाहिए।’

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इसके साथ ही बीसीसीआई ने फ्रेंचाइजियों को यह भी कहा है कि अगर वे किसी एड सामग्री में तीन ऑस्ट्रेलियाई खिलाड़ियों को शामिल करती हैं तो इसमें एक से  अधिक केंद्रीय कॉन्ट्रेक्ट वाला खिलाड़ी नहीं होना चाहिए। वहीं तीनों खिलाड़ी अलग-अलग राज्यों और अलग-अलग बिग बैश लीग टीमों से होने चाहिए। खासतौर पर एक  एड में ऑस्ट्रेलियाई राज्य न्यू साउथ वेल्स और बिग बैश लीग टीम  सिडनी सिक्सर्स के दो खिलाड़ी नहीं होने चाहिए। ऑस्ट्रेलिया क्रिकेट की पाबंदी के बाद बीसीसीआई की इस एडवाइजरी पर कुछ आईपीएल फ्रेंचाइजियों के अधिकारियों ने हैरानी जताई है। उन्होंने कहा, ‘आखिर बीसीसीआई ने ऐसी शर्तों को स्वीकार क्यों किया, जबकि बीसीसीआई को पता है कि ऑनलाइन गेमिंग साइट और शराब कंपनियां ही कुछ फ्रेंचाइजियों की मुख्य स्पॉन्सर हैं, हालांकि ये इतना बड़ा मसला नहीं है, क्योंकि भारत में शराब, सट्टेबाजी और तंबाकू उत्पादों की ब्रांडिंग नहीं होती है। खैर बीसीसीआई को सैद्धांतिक तौर पर ऐसी शर्तों को स्वीकार नहीं करना चाहिए।’
 



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