जारी हुई खतरनाक रिपोर्ट, भारत में इस महीने चरम पर पहुंचेगी ये महामारी, पड़ेगी 10 लाख वेंटीलेटर्स की जरूरत, मौजूद है केवल..

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का कोहराम मचा हुआ है, अब तक पांच लाख से ज्यादा लोग इस वायरस की चपेट में आ चुके हैं। साथ ही 25 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है, देश में भी अब कोरोना का प्रकोप तेजी से बढ़ता जा रहा है। फ़िलहाल 800 से ज्यादा लोग इस वायरस से संक्रमित हो चुके हैं, जबकि 20 लोगों की मौत भी हो चुकी है। स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है. लेकिन, इसी बीच दुनिया की एक बड़ी यूनिवर्सिटी ने भारत को लेकर ऐसी रिपोर्ट दी जिसने सबको डरा दिया है। रिपोर्ट की मानी जाए तो देश में कोरोना वायरस का अभी ये ट्रेलर है, पूरी पिक्चर तो अभी बांकी है।

जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी और द सेंटर फॉर डिजीज डायनेमिक्स, इकोनॉमिक्स एंड पॉलिसी (CDDEP) ने इस रिपोर्ट जारी की है जिसमे आंकड़े भारत की आधिकारिक वेबसाइटों से लिए हैं। यूनिवर्सिटी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में कोरोना वायरस असर जुलाई अंत या अगस्त के मध्य तक खत्म होगा. रिपोर्ट में बताया गया है कि, पूरे देश में सबसे ज्यादा लोग मिड अप्रैल से लेकर मिड मई तक कोरोना से संक्रमित होकर अस्पतालों में भर्ती होंगे। हालांकि, मिड जुलाई यह संख्या कम होती चली जाएगी और अगस्त महीने तक इस वायरस के खत्म होने के आसार हैं।

रिपोर्ट में बताया गया है कि, भारत के करीब 25 लाख लोग इस वायरस की चपेट में आकर हॉस्पिटल जाएंगे, स्टडी में यह भी कहा गया है कि, इस वायरस से भारत में कितने लोग संक्रमित हैं. यूनिवर्सिटी का दावा है कि कई लोग एसिम्टोमैटिक हैं. इसका अर्थ ये है कि कोरोना वायरस से संक्रमितों की संख्या ज्यादा है. उनमें कोरोना के लक्षण भी होंगे लेकिन अभी बहुत कम होंगे. इसलिए, जब उसकी रफ्तार बढ़ेगी तो ही पता चलेगा.

स्टडी में कहा गया है कि, भारत में करीब 10 लाख वेंटीलेटर्स की जरूरत पड़ेगी. लेकिन, फिलहाल यहां अभी 30 से 50 हजार वेंटीलेटर्स ही मौजूद हैं। इसके अलावा देश के सभी अस्पतालों के अगले तीन महीने बहुत ज्यादा मेहनत करनी पड़ेगी, स्थिति ऐसी हो सकती है कि भारत को भी चीन और अन्य देशों की तरह अस्थाई अस्पताल बनाने पड़ेंगे। इतना ही नहीं दूसरे हॉस्पिटल्स से संक्रमण न फैले इसका भी ध्यान रखना होगा।

रिपोर्ट में दावा किया गया है कि, यहां जांच की प्रक्रिया भी धीमी है, जितने अधिक जांच होंगे उतने ज्यादा सही परिणाम मिलेंगे। जॉन हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की स्टडी में कहा गया है कि बुजुर्गों की आबादी को सोशल डिस्टेंसिंग का ज्यादा ध्यान रखना होगा. जितना ज्यादा लॉकडाउन होगा उतने ही ज्यादा लोग बचे रहेंगे। रिपोर्ट में कहा गया है कि तापमान और उमस में बढ़ोतरी होने पर वायरस के संक्रमण या फैलाव पर थोड़ा असर होगा, लेकिन वो पर्याप्त नहीं होगा। क्योंकि इस वायरस पर तापमान का अधिक असर होता दिख नहीं रहा है।

Check Also

चीन से होगी आज अहम बातचीत, TikTok सहित 59 ऐप्‍स बैन लेकिन PAYTM, VIVO, OPPO बैन क्यों नहीं

प्रधानमंत्री आज देश को छठी बार संबोधित करने वाले हैं, जानिए कि चीन की 59 …