Falahari रेप केस- अदालत ने सुनाया ऐतिहासिक फैसला, फलाहारी को आजीवन कारावास की सजा

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राजस्थान/अलवर: फलाहारी रेप मामले में बुधवार (26 सितम्बर) को कोर्ट ने अपना फैसला सुना दिया। फलाहारी यौन शोषण मामले में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश (संख्या-1) राजेन्द्र शर्मा ने मंगलवार को बचाव पक्ष की तीन घंटे बहस सुनने के बाद फलाहारी बाबा को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा कोर्ट ने एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस चर्चित यौन शोषण मामले में सरकार की तरफ से पैरवी कर रहे अपर लोक प्रासीक्यूटर योगेन्द्र सिंह खटाना व पीड़िता के वकील अनिल वशिष्ठ ने अपराध को साबित करने के लिए 30 मौखिक साक्ष्य, 78 दस्तावेजी एवं 21 आर्टिकल्स साक्ष्य के रूप में पेश किए। जिसके बाद कोर्ट ने बुधवार को अपना फैसला सुनाया है।

पत्रिका में छपी खबर के अनुसार, छत्तीसगढ़ के बिलासपुर की रहने वाली एक युवती ने 7 अगस्त 2017 को अलवर के मधुसूदन आश्रम में रहने वाले फलाहारी बाबा पर यौन शोषण का आरोप लगाते हुए एक महीने बाद बिलासपुर पुलिस थाने में एफआईआर दर्ज कराई थी। जीरो नम्बर एफआईआर दर्ज करने के बाद बिलासपुर पुलिस ने इस मामले को अलवर पुलिस को सौप दिया था। अरावली विहार थाना पुलिस को मिली दर्ज एफआईआर पर 20 सितम्बर 2017 को फलाहारी के खिलाफ मामला दर्ज करके 23 सितम्बर को बाबा को गिरफ्तार कर लिया गया था।

फ़िलहाल फलाहारी न्यायालय के आदेश के बाद से न्यायिक कस्टडी में है। अरावली पुलिस ने मामले की जाँच रिपोर्ट अपर मुख्य न्यायाधीश संख्या-2 के सामने पेश की, लेकिन मामला सेशन ट्रायल होने की वजह से इस अदालत से जिला एवं सेशन न्यायालय में ट्रांसफर किया गया। जहाँ से अपर जिला एवं सेशन न्यायालय संख्या-1 अलवर को समिट किया गया।

जिसके बाद न्यायाधीश राजेन्द्र शर्मा की अदालत में 11 जनवरी 2018 को कवर आने पर न्यायाधीश शर्मा ने 22 जनवरी 2018 को फलाहारी पर यौन शोषण की धारा 376 (22) (च) एवं पीड़िता के शरीर व प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की धारा- 506 के तहत आरोप तय किए गए। इस बहुचर्चित मामले में सरकार की ओर से पैरवी कर रहे अपर लोक प्रासीक्यूटर योगेन्द्र सिंह खटाना व पीड़िता के वकील अनिल वशिष्ठ ने यौन शोषण को साबित करने के लिए 30 मौखिक साक्ष्य, 78 दस्तावेजी एवं 21 आर्टिकल्स सबूत के रूप में पेश किए।

इस मामले में प्रासीक्यूटर की बहस पूरी होने के बाद बचाव पक्ष को मौका दिया गया। वकील अशोक कुमार शर्मा ने सात गवाहों के बयान लिए तथा फलाहारी के बचाव के लिए मंगलवार से मंगलवार तक छुट्टी को छोड़कर चार दिन में नौ घंटे बहस कर अदलात को अपनी दलील दी और तर्क सामने रखे। मंगलवार को प्रासीक्यूटर और बचाव पक्ष की बहस पूरी होने के बाद न्यायाधीश राजेन्द्र शर्मा ने मामले में अपना फैसला सुनाते हुये फलाहारी को दोषी पाते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। साथ ही फलाहारी पर अदालत ने एक लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

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