लॉकडाउन में आत्मनिर्भर बना पिता, 500 किमी रिक्शा खींचकर परिवार को लाया घर

लॉकडाउन के कारण लोगो का रोजगार ख़त्म होने की वजह से प्रदेस में फंसे मजदूरों दवारा घर वापसी की जा रही है। इस बीच वाहन बंद होने की वजह से कोई पैदल, कोई ट्रकों पर, कोई नई साइकिल खरीदकर घर के लिए निकल पड़ा है। ऐसे में एक श्रमिक का पूरा परिवार और गृहस्थी के साथ रिक्शे से गांव के लिए निकल पड़ा।

एक हफ्ते का सफर करने के बाद परिवार के साथ महोबा के बरा गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने श्रमिक का हौंसला बढ़ाया। लॉकडाउन के चलते रोजगार बंद होने से खाने तक के लाले पड़ गए थे। थाना श्रीनगर के ग्राम बरा के रहने वाले रामचरण सात माह से परिवार के साथ दिल्ली में मजदूूूूरी करता था।

लेकिन अचानक मार्च के महीने में लॉकडाउन होने से काम बंद हो गया। एक महीने तक काम शुरू होने की उम्मीद में वह लोग दिल्ली में ही रहे लेकिन बार बार लॉकडाउन बढ़ता गया। इससे उसके सामने रोजी-रोटी का संकट आ गया। उसके सभी साथी फे ही पैदल और ट्रकों से निकल चुके थे। जिसके बाद श्रमिक रामचरण ने भी घर आने का मन बनाया।

पहले तो राजधानी दिल्ली से महोबा आने के लिए कोई वाहन न मिलने से बीस दिन तक श्रमिक परेशान रहा। लेकिन फिर उसने एक पुराना रिक्शा खरीदा और परिवार के सभी नौ लोगों को रिक्शे में बैठाकर गांव के लिए निकल पड़ा। कुछ दूर रामचरण रिक्शा चलाता था तो छोटा भाई आराम करता था फिर छोटा भाई रिक्शा चलाता था तो बड़ा भाई आराम करता था। दिनरात एक सप्ताह तक रिक्शा चलाने के बाद रामचरण के परिवार को मंजिल मिल गई। फिर घर आने के बाद परिवार के लोगों से मिलकर खुश हैं।

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