सवर्ण आंदोलन से घबराई सरकार, नेताओं को कर रही है नज़रबंद

दिल्ली: 25 सितंबर को दिल्ली में होने वाले प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रस्तावित दौरे के मद्देनज़र देश में बढ़ रहे SC/ST एक्ट का विरोध कर रहे सवर्ण समाज के आंदोलन को रोकने के लिए अब सरकार पुलिस डंडे का इस्तेमाल करेगी। प्रशासन ने सपाक्स एवं सवर्ण समाज के नेताओं से बैठक कर चेतावनी दी है की अगर प्रधानमंत्री दौरे में किसी भी तरह लॉ एंड आॅर्डर की स्थिति बिगड़ती है तो उन सभी के खिलाफ FIR से लेकर कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी।

अब पुलिस प्रशासन सपाक्स (सामान्य पिछड़ा एंव अल्पसंख्यक वर्ग अधिकारी कर्मचारी संस्था) एवं सवर्ण समाज आंदोलन के सक्रिय नेताओं को नजरबंद करने की भी तैयारी में है। जिससे राजधानी में प्रधानमंत्री के प्रस्तावित दौरे के दौरान किसी भी तरह की कोई लॉ एंड आॅर्डर की स्थिति न बिगड़े। आपको बतादे की इससे पहले मध्य प्रदेश में पुलिस प्रशासन ने बालाघाट में हुई मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआर्शिवाद यात्रा में इस रणनीति को आजमा चूका है।

मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की जनआर्शिवाद यात्रा के एक दिन पहले पुलिस प्रशासन ने सपाक्स संगठन के राजेश वर्मा और कर्मचारी अधिकारी संघ एवं युवा संगठन के अमित चौबे को नजरबंद कर दिया था। जिसके बाद शिवराज की जनआर्शिवाद यात्रा में सपाक्स और सवर्ण समाज के लोगो का किसी तरह का कोई विरोध नहीं हुआ।

लेकिन अब सपाक्स संगठन ने मंदसौर जिले की सीतामऊ तहसील में स्थानीय नेताओं का विरोध करने का एक नया तरीका ढूढ़ लिया है। गांव में जब किसी भी पार्टी का नेता पहुँचता है तो सभी लोग इखट्टा हो जाते है और जैसे ही नेता जी भाषण देना शुरू करते है वहाँ मौजूद सभी जय सपाक्स जय सपाक्स के नारे लगाने लगते है। और साथ ही अपनी-अपनी जेबो से काले झंडे निकाल कर लहराने लगते हैं। जिसके बाद नेता मंच छोड़कर भागने लगते है। इस तरह से विरोध करने का तरीका सबसे पहले सुवासरा तहसील से हुई थी। लेकिन अब इस तरह से विरोध करने का तरीका कई जिलों में देखने को मिल रहा है।

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