एचएएल का 20 हजार करोड़ रुपये एयरफोर्स पर बकाया, विदेशी कंपनी को हुआ इतने हजार करोड़ रुपए का पेमेंट

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नई दिल्ली: हिन्‍दुस्‍तान एयरोनोटिक्‍स लिमिटेड (HAL) आज कल पैसो की तंगी से जूझ रही है। यहाँ तक की उसके पास अपने कर्मचारियों को सैलरी देने तक को पैसे नहीं है। हिन्‍दुस्‍तान एयरोनोटिक्‍स लिमिटेड को अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए ओवरड्राफ्ट के माध्यम से 1000 करोड़ रुपए लेने पड़े है। जनसत्ता के अनुसार, रक्षा निर्मित कंपनी के अध्‍यक्ष आर. माधवन ने बताया कि मौजूदा वित्‍त वर्ष के समाप्त होने तक हिन्‍दुस्‍तान एयरोनोटिक्‍स लिमिटेड का एयरफोर्स पर कुल 20 हजार करोड़ रुपए का बकाया हो जाएगा। जिसका अभी तक भुक्तान नहीं किया गया है।

रक्षा जानकार और डिफेंस ब्‍लॉगर अजय शुक्‍ला ने इसको लेकर चौकाने वाले खुलासे किये है। उनका कहना है की वायुसेना एचएएल का बकाया का भुगतान न करके लेकिन विदेशी कंपनियों का भुक्तान समय पर किया जा रहा है जिसमे दॉसो भी शामिल है। रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से डिफेंस ब्‍लॉगर अजय शुक्‍ला ने बताया की, एयरफोर्स की तरफ से 36 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने के लिए फ्रांस की कंपनी दॉसो एविएशन को लगभग 20 हजार करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। जिसकी वजह से एयरफोर्स के पास एचएएल को भुगतान देने के लिए पैसे नहीं बचे है।

गौरतलब है की, एचएएल को अपने कर्मचारियों को सैलरी देने के लिए हर महीने 358 करोड़ रुपए देने होते है। इसके अलावा कंपनी को अपना प्रोडक्‍शन को जारी रखने के लिए भी हर महीने 1,300 से 1,400 करोड़ रुपए की आवश्यकता होती है। कर्मचारियों को सैलरी देने तथा अन्य जरूरतों की वजह से एचएएल को पहली बार जनवरी में बैंक से 781 करोड़ रुपए लोन लेने पड़े थे।

इसके अलावा एचएएल कंपनी अपने कैश रिजर्व से गवर्नमेंट को 11,024 करोड़ रुपए दे चुकी है। जिसमे डिविडेंड फण्ड के तौर पर दी गयी 4,631 करोड़ रुपए की राशि शामिल है। खबरों के अनुसार, एयरफोर्स ने विदेशी कंपनियों का भुक्तान समय पर किया। लेकिन एचएएल को देने के लिए एयरफोर्स के पास पैसे नहीं है।

वही दोनों कंपनियों से न तो लड़ाकू विमान मिले है और ना ही हेलिकॉप्‍टर की डिलीवरी हुई है। इसी क्रम में भारत के सशस्‍त्र बलों ने लड़ाकू विमान तथा हेलिकॉप्‍टर खरीदने के लिए पिछले कुछ सालो में कई रक्षा सौदे किए हैं। जिनमे राफेल लड़ाकू विमान (दॉसो एविएशन-फ्रांस) और अपाचे व चिनकूक हेलिकॉप्‍टर (बोइंग-अमेरिका) खरीद प्रमुख रक्षा सौदा है। भारत के सशस्‍त्र बलों ने हेलिकॉप्‍टर के लिए अमेरिकी रक्षा कंपनी बोइंग के साथ समझौता साल 2015 में किया था। वही बोइंग कंपनी को भी हर साल 2,000 करोड़ रुपए के हिसाब से भुगतान किया जा चुका है। वही दोनों कंपनियां इसी साल से डिलिवरी देना शुरू कर देगी।

वही एचएएल के अध्‍यक्ष आर. माधवन ने कहा की, “एचएएल एयरफोर्स को लड़ाकू विमान और हेलिकॉप्‍टर के साथ अन्‍य सेवाएं भी उपलब्ध करा चुकी है। इसके बाद भी एचएएल का एयरफोर्स पर करीब 15,700 करोड़ रुपए का बकाया है। 31 मार्च तक यह आंकड़ा 20,000 करोड़ रुपए तक पहुंच जाएगा।” बता दें कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने राफेल लड़ाकू विमान बनाने के निर्देश में हिन्‍दुस्‍तान एयरोनोटिक्‍स लिमिटेड (HAL) को अयोग्य बताया था।

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