हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के रिसर्च में खुलासा: 2022 तक नहीं मिलेगा दुनिया को कोरोना से छुटकारा, सोशल डिस्टेंस का होगा अधिक समय तक पालन

पूरी दुनिया में अब तक कोरोना महामारी से 1 लाख 40 हजार से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। और 21 लाख से ज्यादा लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है। पूरी दुनिया इस बीमारी का कहर झेल रही है। इस महामारी से बचने के लिए 115 देशों को लॉकडाउन किया जा चुका है। लेकिन अब सवाल है कि लॉकडाउन कब तक ? इस सवाल का जवाब दिया है हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने। उनका कहना है कि अगर कोविड-19 की वैक्सीन नहीं बनती है तो इस स्थिती में सोशल डिस्टेंसिंग से जुड़े उपायों को साल 2022 तक करना पड़ सकता है।

शोधकर्ता स्टीफन किसलर ने बताया कि, कोविड-19 वैक्सीन, मौसम बदलने के साथ बीमारी बढ़ने की शंका, इंसान के शरीर में कोरोना वायरस के खिलाफ शरीर में उत्पन्न हुई प्रतिरोधक क्षमताओं आदि को ध्यान में रखते हुए इसका अनुमान लगाया है।

साथ ही शोधकर्ताओं का कहना है कि कोविड-19 सीजनल हो जाएगा। यह बिल्कुल वैसा ही होगा जैसे सर्दी के मौसम में लोग वायरल से जूझने लगते हैं।

रिसर्चर किसलर के मुताबिक अगर कोरोना वायरस पर अगले कुछ महीनों में काबू पार लिया जाता है तो भी सभी लोगों को सावधानी से रहना पड़ेगा। साथ ही उनका कहना है कि अगर इसकी वैक्सीन मिल भी जाती है तो यह देखना होगा कि वह कितने दिनों तक इंसानों को कोरोना वायरस से सुरक्षा दिलाने का काम करती है। क्योंकि ऐसा कहा जा रहा है कि कोरोना अपने आप को मौसम के मुताबिक ताकतवर भी कर रहा है। ऐसे में महामारी से बचने के लिए 2022 तक सोशल डिस्टेंसिंग ही एकमात्र रास्ता हो सकता है।

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