लॉकडाउन में ड्यूटी ज्वाइन करने के लिए हेड कॉन्स्टेबल ने 17 दिन में चले 600KM, हर कोई जज्बे को कर रहा सैल्यूट

लॉकडाउन में ट्रांसफर होने के बाद 59 साल के रमेश सिंह तोमर 600 किलोमीटर पैदल सफर तय कर उज्जैन ड्यूटी के लिए पहुंचे हैं। रमेश सिंह तोमर के इस जज्बे को देखकर बड़े अधिकारियों ने सैलूट किया है। बता दे कि प्रधान आरक्षक रमेश सिंह तोमर ग्वालियर से उज्जैन 17 दिन पैदल चलकर पहुंचे।

उज्जैन के नीलगंगा थाने में पदस्थ प्रधान आरक्षक रमेश सिंह तोमर जब उज्जैन पहुंचे तो उनका साथियों ने जबरदस्त स्वागत किया। इसके अलावा उनका चेकअप कराया गया पूरी तरह से स्वस्थ होने के बाद सोमवार से ड्यूटी ज्वाइन करेंगे। रमेश सिंह तोमर के इस जज्बे की तारीफ पूरे उज्जैन में हो रही है हालांकि रमेश सिंह तोमर कुछ दिन बाद ही रिटायर होने वाले हैं।

मिली जानकारी के अनुसार, प्रधान आरक्षक रमेश सिंह तोमर 20 मार्च को एक मामले में बिसरा की रिपोर्ट देने के लिए एफएसएल की लैब ग्वालियर गए थे। लेकिन 22 मार्च को जनता कर्फ्यू और लगातार लॉकडाउन के कारण हो वहीं फंसे रह गए।

बाद में कुछ दिन ग्वालियर में वह अपनी बेटी-दामाद के घर रुके। जिसके बाद वह अपने पैतृक घर मुरैना चले गए। लेकिन ड्यूटी ज्वाइन करने की बेचैनी तोमर सिंह को सोने नहीं दे रही थी। इसलिए वह 600 किलोमीटर पैदल चलकर शुक्रवार को उज्जैन पहुंचे और थाने पर हाजिरी दी।

जब अधिकारियों को पता चला कि प्रधान आरक्षक तोमर ड्यूटी के लिए 600 किलोमीटर पैदल सफर तय कर आए तो वह सन्न रह गए आनन-फानन में उनका थाने में ही फूल माला पहनाकर स्वागत किया गया।

प्रधान आरक्षक तोमर ने बताया कि हर रोज 30 किलोमीटर पैदल चलते थे। जहां खाना मिलता था खा लेते थे उसके बाद वह चल देते थे। रास्ते में कई गाड़ी और बाइक पास से गुजरे लेकिन किसी ने उन्हें नहीं बैठाया। वही साथ काम करने वाले लोगों ने कहा कि वह काफी सरल है इसलिए लोगों ने उनकी मदद नहीं की और वह खुद पैदल चलकर उज्जैन पहुंच गए।

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