#नियोग_और_दूसरा_निकाह_में_कितना_फ़र्क़ है, जानिये

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इस्लाम ने कभी भी औरत को किसी भी मसले पर तन्हा नही छोड़ा है।
अगर औरत में कमी की वजह से बच्चे पैदा नही होते है, तब वह मर्द दूसरी निकाह कर सकता है इससे फायेदा,पहली वाली बीवी को ये होगा कि #सहारे_की_लाठी मिलेगी।अगर पहली वाली बीवी का बर्ताव सही रहा तब।
और बगैर #उजड़े_शरई में पहली वाली बीवी की रजामंदी जरूरी नही है जब रब की रजामंदी है तो किसी ओर की रजामंदी की जरूरत नही दूसरी निकाह के लिए।

अगर मर्द बाप बनने का मादा नही रखता है तब उसे निकाह नही करना चाहिए,,,,।और ऐसे मौके पर औरत तलाक़ ले सकती है अपने कोख से बच्चे पैदा करने के लिए।
इस्लाम में मियां/बीवी की आपसी रिश्ते की अहमियत बहुत है तभी तो,,दूसरी निकाह यानी जाएज़ तरीके से,बच्चे पाने की सहूलियत है।नही तो,,#नियोग के बारे में सुने होंगे,,,इसमे बच्चा पैदा करने में असमर्थ पति की पत्नी अपने देवर,से सम्भोग सुख प्राप्त करके माँ बन सकती है,,,,यहाँ निकाह की जरूरत नही
मगर इस्लाम ने दूसरी शादी का हुक्म दिया ताकि औरत जात को सिर्फ बच्चे पैदा करने की मशीन न समझा जाये जाएज़ तरीके से औरत को उसका पूरा शौहर-हक़ देना ये इस्लामम की देन है ओर यही मुहब्बत का मजबूत एहसास वाली कड़ी है जिसमे दोनों पत्नी राज़ी है अब कैसा एहसास ढूंढ रहे हो,,,?

जवानी में तो लाख गुल खिला लो
मगर जब हड्डियां कमजोर होगी,,,
आज तो जाएज़ औलाद भी कतराते है
खिदमत करने को माँ/बाप की,
फिर नाज़ायज़ से क्या उम्मीद रखते हो ?

स्लाम मे दूसरे औरत की दूध को पिलाना बच्चे को सही है,,,,क्यो की ये एक ममता से जुड़ा मामला है।

सेरोगेसी,,,जिसमे दो डिफरेंट लोगो का जिसमे जाएज़ रिस्ता ही नही होता है वहाँ
मर्द के सीमेन को अनजान औरत के यूटिरस में डाला जाता है इसमें डालने का तरीका प्रत्यक्ष रूप से न सही मगर यहाँ विवाहित जोड़े तो नही?
तलाक़ और दूसरी निकाह का खर्च सेरोगेसी के खर्च के बराबर है क्या,,,,,?

साभार- Sikander Kaymkhani

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