जनता की परेशानियों को अनदेखा कर मूर्ति बनवाने, धार्मिक पर्व के लिए ज्यादा पैसा ख़र्च करना बहुत बड़ा पाप है

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दुनिया हर इंसान के लिए इम्तेहानगाह है। जो भी इम्तेहान में पास हो जाएगा उसको मरने के बाद स्वर्ग मिलेगा और इम्तेहान में फ़ेल होने वाला बदनसीब नर्क में डाल दिया जाएगा। ऐसा ही विभिन्न धर्मों में कहा गया है। जिस तरह इम्तेहान में कामयाबी के लिए अच्छे काम हैं उसी तरह पाप कर्म भी हैं जो उसको फ़ेल करा देते हैं। हिन्दू धर्मगुरुओं के प्रवचन सुनने से दो विचारधाराएं मिलती हैं। एक में तो पापी को मरने के बाद नर्क में डालने की बात कही जाती है और पुनर्जन्म की विचारधारा के अनुसार पापी को पापकर्म के अनुसार उसी प्रकार की योनि में जन्म होने की बात कही जाती है।

पाप कर्मों की बात करें तो अमानत में ख़यानत एक ऐसा पाप है जिसको करने वाला सज़ा से नहीं बच सकता। लोकतन्त्र में चूँकि देश का खज़ाना जनता के लिए होता है और जनता द्वारा चुने हुए राजा को उस ख़ज़ाने का प्रयोग केवल जनता की भलाई और देशहित में करने का हक़ होता है लिहाज़ा उसके ख़िलाफ़ अपनी किसी आस्था की सन्तुष्टि के उद्देश्य से यदि धन ख़र्च किया जाता है तो वह अमानत में ख़यानत की श्रेणी में आता है। यदि जनता भूखी हो तो ऐसी स्थिति में तो जनता की भलाई के कामों को नज़रअन्दाज़ करके अपनी आस्था वश किसी मूर्ति के बनवाने पर या किसी धार्मिक पर्व को मनाने के लिए अपार धनराशि ख़र्च करना तो बहुत ही बड़ा पाप है।

ऐसी स्थिति में हिन्दू धर्म गुरुओं की ज़िम्मेदारी बनती है कि वह इस तरह की अमानत में ख़यानत से रोक कर इस प्रकार से खर्च किये जाने वाले धन को जनता की भलाई में खर्च करने के लिए राजा को प्रोत्साहित करें। इसके लिए ख़यानत करने वाले शख़्स को यह बताया जाए कि यह अपराध है और ऐसे अपराधी को मरने के बाद नर्क में भेजा जाएगा और यदि आवागमन की थ्योरी को सही मानते हैं तो यह बताएं कि इस प्रकार की अमानत में ख़यानत करने वाला अपराधी अगले जन्म में कुत्ता बनेगा, सूअर बनेगा या शौचालय का कीड़ा बनेगा। यह जानकारी अपने ज्ञान के आधार पर धर्म गुरु जब बताएंगे तो हो सकता है कि अपनी ऐसी दुर्गति के भय से अमानत में ख़यानत करने से बचने लगें और जनता के धन का सदुपयोग होने लगे।

साभार- Mohd Sharif

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