प्रतीकात्मक तस्वीर

कोटा में जेके लोन अस्पताल बना भूतिया, नहीं थम रही बच्चों की मौत की रफ़्तार, अब तक 102 की गयी जान

कोटा के जेके लोन अस्पताल में बच्चों की मौत का सिलसिला रुकने का नाम नहीं ले रहा है अब तक कुल 102 बच्चों की इलाज के दौरान मौत हो चुकी है। साल 2020 के पहले 2 दिनों में ही 2 बच्चों की मौत हुई थी। साल 2019 के दिसंबर महीने में मौत का आंकड़ा अचानक बढ़ने से कोटा में हड़कंप मच गया था जिसको लेकर राज्यसभा स्पीकर ओम बिरला ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को स्मरण पत्र भेजकर दुःख जताया था।

राज्यसभा स्पीकर ओम बिरला ने अपने ट्वीट में लिखा की, “राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को पुनः स्मरण पत्र भेजकर संसदीय क्षेत्र कोटा के जेके लोन मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में शिशुओं की असमय मृत्यु की प्रतिदिन बढती संख्या को देखते हुए संवेदनशीलता के साथ चिकित्सा सुविधाओं के मजबूत बनाने के लिये आग्रह किया।”

जब विपक्ष ने बच्चों की मौत को लेकर अशोक गहलोत सरकार को घेरा तो जांच रिपोर्ट में पाया कि बच्चों की मौत इलाज में लापरवाही नहीं बल्कि ऑक्सीजन पाइप लाइन और ठंड पाई गई। अकेले दिसंबर महीने में ही 100 बच्चों की मौत हो गई थी। साल 2019 में कुल 963 मौतों के आंकड़े ने जेके लोन अस्पताल में वहां के जिम्मेदारों पर सवाल खड़े कर दिए थे।

अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि साल 2018 में 1005 बच्चों की मौत हुई थी जबकि 2019 में बहुत कम मौते हुई हैं जो अभी तक आंकड़ा 102 है। जेके लोन अस्पताल के शिशु रोग विभाग के अध्यक्ष अमृतलाल बैरवा का कहना है कि ज्यादातर बच्चों की मौत जन्म से पहले प्रीमैच्योर होने की वजह से हुई है। उनकी मौत इलाज में कमी की वजह से नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि किसी का जन्म के समय से ही वजन बहुत कम था तो किसी को रेफर के दौरान परिजनों द्वारा लापरवाही की वजह से मौते हुई है।

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