ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कहा, कांग्रेस में रहकर में देश की सेवा नहीं कर पा रहा था, लेकिन अब बीजेपी

मध्य प्रदेश की राजनीतिक कयासों पर विराम लगाते हुए होली के दिन ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा दे दिया है। सिंधिया ने पहले केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और पीएम मोदी से मुलाकात की और फिर उसके बाद सोनिया गांधी को अपना इस्तीफा भेज दिया। जिनके साथ कमलनाथ सरकार के 6 मंत्री समेत 19 विधायकों ने इस्तीफा दिया।

ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जो इस्तीफा पत्र सौंपा है, उस पर तिथि नौ मार्च है। अपने इस्तीफे में सिंधिया ने कहा, ‘अपने राज्य और देश के लोगों की सेवा करना मेरा हमेशा से मकसद रहा है, लेकिन मैं इस पार्टी में रहकर अब यह करने में अक्षम हूं।’

उन्होंने कहा कि, 18 साल तक कांग्रेस का सदस्य रहने के बाद अब मेरे लिए यह समय कांग्रेस छोड़ने का है। मैं अपना इस्तीफा सौंप रहा हूं। आप यह बखूबी जानती हैं कि मेरे लिए यह स्थिति एक साल से अधिक समय से बन रही थी।

मेरा मकसद राज्य और देश की सेवा करना रहा है। मेरे लिए कांग्रेस में रहते हुए यह करना संभव नहीं रह गया था। मैंने अपने लोगों और कार्यकर्ताओं की आकांक्षाओं को देखते हुए यह महसूस किया कि यह सबसे अच्छा समय है कि मैं अब एक नई शुरूआत के साथ आगे बढूं।

मैं आपको और कांग्रेस पार्टी के मेरे सभी सहयोगियों को धन्यवाद देता हूं कि मुझे देश की सेवा करने के लिए एक प्लेटफॉर्म दिया। वहीं कांग्रेस को इस्तीफा थमाकर सिंधिया के भाजपा ज्वाइन करने की संभवना है। उनके साथ उनके साथी विधायक के इस्तीफे के बाद मध्य प्रदेश की कमलनाथ सरकार पर संकट गहरा गया है। कहा जा रहा है कि, राज्यसभा में उनकी अनदेखी करने पर उन्होंने ऐसा फैसला लिया है।

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