लॉकडाउन: पैर के तलवे फट गए लेकिन रुका नहीं, 28 दिन में 2 हजार किलोमीटर पैदल चला मजदूर, पहुंचा अपने घर मुंबई से दरभंगा

लॉकडाउन लागु होने के बाद कई लोगो को इस बात की चिंता सताई की अब खाना पीना कैसे होगा? बिना काम किए बिना पैसे कहां से आएंगे। रोज़ाना खाने कमाने वालों को सबसे अधिक दिक्कत का सामना करना पड़ा है। ऐसे ही एक मजदूर का सोचना था कि, इन हालात में अगर घर से दूर यहां मुंबई में रहूँगा तो
मर जाउंगा इसलिए वह बिहार अपने गांव की ओर निकल गया। जिसको रास्ते में पुलिस वाले ने 200 रुपये खाने के लिए भी दिए।

एनबीटी में छपी खबर के अनुसार, न दिन देखा न रात बिना थके लगातार चलता रहा। रास्ते में लोगों ने खाना खिलाया और कभी बस पानी पीकर भी आगे चलता गया। इस बीच पैर के तलवे फट गए लेकिन रुका नहीं। मुंबई से आते वक्त कुछ दूर तक तो ट्रेन मिली लेकिन चंद घंटों में ही ट्रेन से उतरा पड़ा क्योंकि ट्रेन रद्द हो गई और फिर लगातार पैदल चलता रहा। और फिर अपने घर पहुंचा।

यह कहानी है दरभंगा के पंचोभ गांव के हरबंश की। जो मुंबई में श्रमिक का काम करते थे लेकिन कोरोना के कारण हुए लॉकडाउन ने उन्हें डरा दिया। फिर पैदल गांव जाने के सिवा उन्हें कुछ नहीं समझ आया।

कोरोना के बढ़ते मामलो को लेकर 24 अप्रैल को जैसे ही लॉकडाउन किया गया हरबंश को सूचना मिली उनके होश उड़ गए। पंचोभ पंचायत के मुखिया राजीव चौधरी ने एनबीटी से कहा कि, हरबंश रोजाना खाने कमाने वाले थे। जिसके चक्कर में वह गांव से मुंबई मजदूरी करने गए थे। लेकिन लॉकडाउन के बाद उनके सामने समस्या ये थी।

Check Also

दुर्दांत अपराधी विकास दुबे को पकड़ने के लिए चारो जनपद में चल रहा चेकिंग अभियान, SSP गोरखपुर खुद सड़क पर उतरे

उत्तर प्रदेश: पुलिस कर्मियों का हत्यारा अभी भी फरार, दुर्दांत अपराधी विकास दुबे अभी भी …