मंदिर बोर्ड ने मानी सुप्रीम कोर्ट की बात कहा- हर उम्र की महिलाओं को मंदिर में मिलेगा प्रवेश

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नई दिल्ली: सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओ के प्रवेश को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में चीफ जस्टिस की अगुआई वाली बेंच ने सुनवाई की। इस मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में 54 पुनर्विचार याचिकाओं सहित 64 अर्जियां लगाई गई थी। हालाँकि त्रावणकोर देवासम बोर्ड जो सबरीमाला मंदिर का प्रबंधन देखता है वह सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को मानते हुए मंदिर में सभी उम्र की महिलाओ के प्रवेश की अनुमति देगा।

पूर्व अटॉर्नी जनरल और वरिष्ठ वकील के.परासरन ने सुप्रीम कोर्ट के 28 सितंबर के फैसले का विरोध करते हुए कहा की परंपरा को छुआछूत के बराबर नहीं रखा जा सकता है यह सिर्फ एक पुरानी धार्मिक रिवाज है। याचिकाकर्ताओं की मांग है कि अदालत अपने दिए गए फैसले पर पुनर्विचार करे। वकील के.परासरन ने कोर्ट द्वारा दिए गए 28 सितंबर के उस फैसले का विरोध करते हुए कहा की, ‘‘संविधान का अनुच्छेद 15 कहता है कि देश के सभी धर्मनिरपेक्ष संस्थानों के दरवाजे सभी के लिए खोले जाने चाहिए, लेकिन यह धार्मिक संस्थानों के लिए नहीं है।’’

बतादे की, सुप्रीम कोर्ट ने 28 सितंबर को 4:1 की बहुमत से फैसला सुनाते हुए सबरीमाला में भगवान अयप्पा मंदिर में दर्शन की लगभग 800 साल पुरानी परंपरा को खत्म करते हुए 10 से 50 साल तक की महिलाओं के प्रवेश को इजाजत दे दी थी। यह फैसला तत्कालीन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पांच जजों की बेंच ने दिया था।

वही कोर्ट के फैसले के बाद बुधवार 2 जनवरी को सबरीमाला मंदिर में सुबह 3:45 बजे दो महिलाओं कनकदुर्गा (39) तथा बिंदु (40) ने भगवान अयप्पा के दर्शन किए। यह 1500 साल के इतिहास में पहली बार हुआ है की किसी 40 साल की उम्र वाली महिला ने अयप्पा के दर्शन किए थे। जिसकी खुद पुष्टि केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने की थी। इसके बाद से पुरे राज्य में प्रदर्शन भड़क गए थे।

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