‘देश में CAA, NRC पर विरोध-प्रदर्शन के बीच मोदी कैबिनेट का NPR को मंजूरी, नहीं देना होगा कोई दस्तावेज’

नई दिल्ली: पूरे देश में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी (NRC) को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शन के बीच मंगलवार को हुयी मोदी सरकार कि केंद्रीय कैबिनेट बैठक में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) को मंजूरी मिल गयी है। जिसकी जानकारी खुद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने दी है।

वहीं केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावेडकर ने यह साफ कर दिया कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) के लिए किसी भी दस्तावेज की जरूरत नहीं है इसके लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा। जो भी भारत में रहता है उसकी गणना एक खास तरह के ऐप से होगी।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने पहले ही यह स्पष्ट कर दिया है कि एनपीआर के लिए किसी भी तरह के दस्तावेज की आवश्यकता नहीं होगी। बता दें कि इससे पहले 2015 में राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के लिए घर-घर सर्वे के माध्यम से जनगणना हुई थी। जिसके अद्यतन किए गए आंकड़ों के डिजिटलीकरण का काम पूरा हो चुका है। इसके बाद यह फैसला किया गया है कि राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का काम जनगणना 2021 के साथ असम को छोड़कर सभी प्रदेशों के और केंद्र शासित प्रदेशों में किया जाएगा।

मोदी सरकार का कहना है कि देश के निवासियों की व्यापक पहचान का डेटाबेस बनाना राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का मुख्य लक्ष्य है। नियम के अनुसार किसी भी स्थानीय क्षेत्र में रहने वाले निवासी को 6 महीने या उससे अधिक समय से रहने के बाद एनपीआर में पंजीकरण कराना जरूरी होता है। बाहरी यानी विदेशी व्यक्ति भी अगर देश के किसी भी हिस्से में 6 महीने से रहता है तो उसे भी राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर में दर्ज होना है।

गृहमंत्री अमित शाह ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि एनपीआर और एनसीआर से कोई संबंध नहीं है राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर के डाटा का इस्तेमाल एनआरसी के लिए नहीं किया जाएगा। दरअसल एनआरसी का उद्देश्य देश में गैरकानूनी तरीके से रह रहे बाहरी की पहचान करना है वहीं राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर का उद्देश्य देश के स्वाभाविक निवासियों का पता लगाना है।

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