मोदी सरकार की बढ़ी मुसीबत, सुप्रीम कोर्ट ने मांगी #राफ़ेल विमान की क़ीमत

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नई दिल्ली: रफ़ाल सौदे में कथित भ्रष्टाचार पर प्रशांत भूषण, पूर्व केंद्रीय मंत्री अरुण शौरी और यशवंत सिन्हा द्वारा जांच की मांग को लेकर दायर याचिका पर चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई की अध्यक्षता में जस्टिस यू यू ललित और जस्टिस केएम जोसेफ़ की बेंच ने बुधवार को इस मामले पर सुनवाई की। इनका आरोप है कि फ़्रांस की डसॉल्ट कंपनी से रफ़ाल लड़ाकू विमानों की ख़रीद फरोख्त में मोदी सरकार ने घोटाला किया है। इस मामले में आप पार्टी के नेता संजय सिंह की भी याचिका को भी शामिल किया गया है।

अदालत में बुधवार को हुई सुनवाई के बारे में अरुण शौरी ने बीबीसी को बताया की, पहले सुप्रीम कोर्ट ने सिर्फ़ रफ़ाल सौदे से जुड़ी प्रक्रिया पर जानकारी मांगी थी, लेकिन अब कोर्ट ने अपनी जांच को बहुत विस्तृत कर दिया है।” इस सौदे में विस्तृत जानकारियां मांगने के अलावा सरकार से पूछा की लड़ाकू विमान की क़ीमत तय कैसे की गई और ऑफ़शोर साथी को सौदे में कैसे शामिल किया गया। शौरी ने आगे बताया की जब भारत के महाधिवक्ता ने केंद्र सरकार की ओर से कोर्ट में कहा की रफ़ाल विमान सौदे की कीमते गुप्त है जिस पर कोर्ट ने कहा कि सरकार अदालत से ये बात शपथपत्र पर कहे।

शौरी ने कहा की, सरकार को ये बात शपथपत्र पर कहना बहुत मुश्किल होगा। क्यूंकि पूर्व रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने पहले ही जानकारी दी थी कि 126 लड़ाकू विमानों की क़ीमत 90 हज़ार करोड़ होगी। इससे तो एक लड़ाकू विमान की कीमत 715 करोड़ होगी। इसके अलावा रक्षा राज्य मंत्री ने संसद में लिखित सवाल के जवाब में कहा था कि एक लड़ाकू विमान की क़ीमत 670 करोड़ रुपए होगी। जबकि अपनी सालाना रिपोर्ट में रिलायंस और डसॉल्ट कंपनी ने कहा था कि एक विमान की क़ीमत 670 करोड़ रुपए नहीं बल्कि 1670 करोड़ रुपए होगी।

वही इस मामले पर केंद्र सरकार का कहना है की फ़्रांस से हुई रफ़ाल लड़ाकू विमान डील में गोपनीयता की शर्त है। जिस पर शौरी कहना है की गोपनीयता की शर्त सिर्फ विमानों की तकनीकी जानकारी पर लागू होती है न की क़ीमत पर।

शौरी के आगे बताया की जब हमने कोर्ट से कहा कि वो CBI से पूछे कि उन्होंने रफ़ाल डील को लेकर हमारी शिकायत पर क्या किया इस पर चीफ़ जस्टिस रंजन गोगोई ने हंस कर बोला की अरे भैया CBI से अभी जांच करवानी है क्या, उनको अपना घर तो संभाल लेने दो फिर देखेंगे।

जब रफ़ाल विमानों की क़ीमत के बारे में फ़्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों से पूछा गया तो उनका कहना है की इसका जवाब देना भारत सरकार पर डिपेंड करता है।

इस मामले पर बीबीसी ने बीजेपी प्रवक्ताओं से संपर्क किया लेकिन ख़बर लिखे जाने तक कोई जबाव नहीं मिल पाया।

रफाल डील पर सवाल उठने के बाद सितंबर में भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने कहा था कि कैग इस समझौते की क़ीमत की जांच करेगी कि NDA का रफ़ाल समझौता अच्छा है या UPA का समझौता अच्छा था।

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