लॉकडाउन में किसी ने नहीं दिया साथ, मां की लाश लेकर अकेली बैठी थी 10 साल की बेटी, अंत में खुद ही उठाई मां की अर्थी

कोरोना महामारी की वजह से अब सभी रिश्ते-नाते भी मरते दिखाई दे रहे हैं। ऐसा ही एक मामला बिहार से सामने आया। यहां एक विधवा महिला की मौत के बाद उसके अंतिम संस्कार करने के लिए सगे-संबंधी तक नहीं आए। जिसके बाद मृतका की 10 साल की बेटी ने अपनी मां की अर्थी को कंधा दिया। आपको बता दें कि, गुरुवार को नवादा जिले के हिसुआ शहर में काफी समय से बीमार चल रही एक विधवा की मौत हो गई।

विधवा महिला के निधन के काफी समय तक परिवार और रिश्तेदारों का अंतिम संस्कार के लिए इंतजार होता रहा। लेकिन, देश में फ़ैल रहे कोरोना के डर से कोई भी अपने घर से निकलकर अर्थी को कंधा देने के लिए नहीं आया।

जिसके बाद शहर के बजरंग दल ने मानवता की मिसाल पेश करते हुए यह बीड़ा उठाया। विधवा महिला की 10 साल की बेटी रिया को साथ में लेकर उसका रीति-रिवाज के अनुसार अंतिस संस्कार किया गया। जहां बेटी ने रिया नम आंखों से अपनी मां की अर्थी को कंधा देने और मुखाग्नि देने का काम किया।

जानकारी के अनुसार, विधवा महिला मृतका रेखा भदानी हिसुआ शहर के वार्ड नंबर 17 में अपनी 10 साल की बेटी के साथ रहती थी। कुछ सालों पहले उसके पति अरविंद माहुरी की भी बीमारी के चलते मौत हो गई थी। मृतका की बीमारी का खर्चा भी बजरंग दल संयोजक मनीष राठौर ने उठाया है। जहां उसे अस्पताल में भर्ती कराया था। बताया है कि, महिला टाइफाइड और टीवी से पीड़ित थी।

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