कोरोना के चलते अब कुछ भी याद नहीं, लेकिन मुसलमानों को लेकर अमित शाह ने कर दिया बड़ा ऐलान कहा, एक भी मुसलमान..

देश की संसद द्वारा पारित एक अधिनियम है जिसके द्वारा सन 1955 का नागरिकता कानून को संशोधित करके यह व्यवस्था की गयी है कि ३१ दिसम्बर सन २०१४ के पहले पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान से भारत आए हिन्दू, बौद्ध, सिख, जैन, पारसी एवं ईसाई को भारत की नागरिकता दी जाएगी। इस विधेयक में भारतीय नागरिकता प्रदान करने के लिए आवश्यक ११ वर्ष तक भारत में रहने की शर्त में भी ढील देते हुए इस अवधि को केवल ५ वर्ष तक देश में रहने की शर्त के रूप में बदल दिया गया है।

नागरिकता संशोधन कानून CAA को लेकर काफी समय तक विरोध प्रदर्शन हुआ, लेकिन फ़िलहाल कोरोना के कहर के बीच ये सब रुका है। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में हो रहे प्रदर्शन ने हिंसा का रूप भी ले लिया था। जिसको लेकर दिल्ली में भी कई जगहों पर हिंसा हुई है,

जिसमें करोड़ों रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुंचाया था। नागरिकता संशोधन कानून के विरोध में लोग शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन कर रहे थे लेकिन बाद में दिल्ली में हिंसा भड़क उठी नागरिकता कानून का विरोध करने वाले और समर्थन करने वाले लोग आपस में भिड़ गए।

जिसका नतीजा हुआ कि इस हिंसा में 42 लोगों से अधिक लोगों की मौत हो गई थी। फिर इस कानून को लेकर एक बड़ा बयान सामने आया है दरअसल उड़ीसा के भुनेश्वर में अमित शाह ने एक रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि, मुसलमानों को लेकर एक बड़ा बयान दिया है।

शाह ने कहा कि “किसी भी हाल में देश के एक भी मुसलमान की नागरिकता CAA के कारण जाने नहीं देंगे।” उन्होंने अपनी बात फिर से दोहराई और कहा कि “यह बिल नागरिकता खेलने के लिए नहीं बल्कि नागरिकता देने के लिए बनाया गया है।”

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