परिवर्तन चौक पर जुटी अवाम कहा एनआरसी-सीएबी नामंज़ूर, पुलिस ने लिया हिंसा का सहारा

लखनऊ: साझी शहादत के संदेश को मजबूत करने के लिए बिस्मिल-अशफाक शहादत दिवस पर अम्बेडकर के वास्ते गांधी के रास्ते के नारे के साथ आज लखनऊ की अवाम की तरफ से गैरसंवैधानिक नागरिकता संशोधन विधेयक के खिलाफ परिवर्तन चौक से गांधी प्रतिमा हज़रतगंज तक निकलने वाले शान्तिमार्च में शामिल होने वाली आम अवाम को पुलिस द्वारा जगह-जगह रोका गया।

उसके बाद भी हज़ारों की संख्या में इस शांति मार्च में शामिल होने महिलाएं, पुरुष, छात्र-नौजवान निकले। इस शांतिपूर्ण मार्च में प्रायोजित तरीके से पुलिस द्वारा हिंसक हमला किया गया जिसमें बहुत से लोगों को चोटें आई है। इसके लिए सीधे तौर पर राज्य सरकार और केंद्रीय गृहमंत्री ज़िम्मेदार हैं।

गैरसंवैधानिक नागरिकता संशोधन विधेयक के विरोध में होने वाले प्रदर्शन को लेकर 18 दिसंबर की शाम से नज़रबंद रिहाई मंच के अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि हम सभी लोग देश के संविधान और कानून को मानने वाले लोग है और इसीलिए अम्बेडकर के वास्ते गांधी के रास्ते के नारे के साथ शांतिपूर्ण तरीके से अपना विरोध दर्ज कराने सड़कों पर उतरे।

लेकिन जैसा कि पूरे देश ने धर्म के आधार पर संविधान में हुए इस बदलाव को नकार दिया और देश की आम-अवाम सड़क पर उतर आई है उससे घबरा कर सरकारें पुलिसिया दमन पर उतारू हो गईं हैं। इतना ही नहीं आंदोलन में शामिल तमाम नेताओं पर फर्जी मुकदमे लगाए जा रहे हैं और उनको नज़रबंद कर पूरे आंदोलन को ही नेतृत्व विहीन किया जा रहा है।

रिहाई मंच महासचिव राजीव यादव ने कहा कि हम अशफाक और बिस्मिल की साझी शहादत के ऐतिहासिक दिन बाबा साहब के संविधान को बचाने के लिए गांधी के रास्ते इस विभाजनकारी कानून का विरोध करने उतरे लेकिन इस आंदोलन पर पुलिसिया हमले ने अंग्रेज़ी हुकूमत की याद दिला दी। हम इस देश को आज़ाद कराने वाले शहीदों के वारिस हैं हम इस दमन से डरने वाले नहीं हैं। हम सभी मिलकर तब तक सड़कों से नहीं हटेंगे जब तक यह गैर संवैधानिक काला कानून वापस नहीं लिया जाता है।

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