राजस्थान में आरक्षण की भड़की आगः गुर्जरों ने कहा – 5% दो आरक्षण नहीं तो, करो या मरो की लड़ाई

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photo credit: ANI

राजस्थान: राजस्थान में एक बार फिर 5 फीसदी आरक्षण की मांग को लेकर माहौल गर्म है। शुक्रवार 8 फरवरी 2018 को सवाई माधोपुर जिले में गुर्जर नेता किरोड़ी सिंह बैंसला अपने समर्थकों के साथ के साथ दिल्ली-मुंबई रेल रूट पर बैठकर 5 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे थे। जिससे कुछ समय के लिए दिल्ली-मुंबई रेल रूट में रुकावट उत्पन्न हो गई थी।

किरोड़ी सिंह बैंसला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए कहा, “हम पांच फीसदी आरक्षण चाहते हैं, पर सरकार ने अभी तक हमारी दरख्वास्त का जवाब नहीं दिया। ऐसे में मैं आंदोलन छेड़ने जा रहा हूं। सरकार हमें आरक्षण दे, मुझे नहीं पता कि वह कहां से हमें हिस्सा देगी। यह बात वह ही जानें।”

गुर्जर नेता ने यह 5 फीसदी आरक्षण पांच समुदायों को मिलाकर माँगा है जिसमे गुर्जर भी शामिल हैं। पिछले महीने किरोड़ी सिंह बैंसला ने राजस्थान सरकार को इस सिलसिले में अपना रुख साफ करने के लिए 20 दिनों की मोहलत दी थी। साथ ही यह चेतावनी भी दी की इन समुदायों को सरकारी शिक्षा और नौकरियों में आरक्षण नहीं दिया तो बड़ा आंदोलन होगा।

उन्होंने आगे कहा की, सरकार ने इस सिलसिले में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। जिसके बाद मलारना डूंगर में महा पंचायत को संबोधित कर किरोड़ी सिंह बैंसला अपने समर्थकों के साथ रेल पटरी पर जाकर बैठ गए। बैंसला का कहना है की, “चीजें तेजी से बदल रही हैं। मैं यहां नहीं आया हूं, लोग मुझे लेकर आए हैं। लोगों को हमेशा बेवकूफ नहीं बनाया जा सकता। यह करो या मरो की लड़ाई है। राज्य सरकार को अपने वादा पूरा करना चाहिए। हम इसके खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन करेंगे। मैं इस प्रदर्शन का नेतृत्व करूंगा और युवा इसका जमकर समर्थन करेंगे।”

वही जैसे ही प्रदर्शन शुरू हुआ सरकार की साँसे फूलना शुरू हो गई। उच्च स्तरीय बैठके होनी शुरू हो गयी। जिससे की इन प्रदर्शनकारियों को समझाया जा सके। मौजूदा समय में इन समुदायों को अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत अलग से एक फीसदी आरक्षण दिया जा रहा है लेकिन ये प्रदर्शनकारी अलग से सरकारी शिक्षा और नौकरियों में 5 फीसदी आरक्षण की मांग कर रहे है। जिसमे गदिया लोहार, बंजारा, गुर्जरों, राया-रेबाड़ी और गड़रिया समुदाय आते है।

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