‘रविश कुमार: योगी जी 2016 की सिपाही भर्ती का क्या हुआ?’

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राजनीति में पूरा जीवन लगा देने के बाद कोई मुख्यमंत्री बनता है। मैं समझना चाहता हूँ कि फिर काम क्यों नहीं किया जाता है। सिर्फ़ दिखने या दिखाने लायक़ योजनाओं पर ही ज़ोर नहीं लगाना चाहिए। आपकी सरकार है। आख़िर कब नौकरियों के सिस्टम को बेहतर करेंगे। कुछ तो पहले से बेहतर हो। कैसे आप आपके मंत्री झूठ मूठ के दफ़्तर आने वाले आई ए एस अफ़सरों की जमात इन तरह की देरी को बर्दाश्त करते हैं।

ठीक है कि यूपी-बिहार के ज़्यादातर लड़के सांप्रदायिकता के प्रोजेक्ट में खप गए हैं। व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी ने इनके दिमाग़ को इस तरह बना दिया है कि कहीं भी एक धर्म का नाम देखते हैं, सोचना बंद कर देते हैं। इसलिए यूपी बिहार के कालेजों में एक तरह की मुर्दा शांति आ गई है। यह आपके लिए बहुत अच्छा है।

आप इन्हें नौकरी न देकर व्हाट्स एप यूनिवर्सिटी में उस एक धर्म के ख़िलाफ़ रोज़ सामग्री की आपूर्ति करवाएँ ये नौजवान नौकरी का दर्द भूल जाएँगे। मैं उनकी सोच काफ़ी गहराई से देखी है। बीस साल तक वे इसी में लगे रहेंगे। इसिलए आपको चिन्ता करने की ज़रूरत नहीं है। भारत के युवाओं को परमानेन्ट बेरोजगार रखकर सांप्रदायिकता को राष्ट्रवाद का नाम देकर परमानेन्ट वोटर बनाया जा सकता है ये प्रोजेक्ट यूपी और बिहार में सफल हो गया है।

फिर भी मुझे लगता है कि ये नौजवान आपके ही हैं। कम से कम इतना भी मत कीजिए कि 2016 की परीक्षा का चार साल में कोई रिज़ल्ट ही न आए। ये देरी आपकी क्षमता पर सवाल करती है। (रविश कुमार)