RBI ने फिर रेपो रेट में की 0.25% कमी, ग्राहकों को अब सस्ते लोन मिलने की जगी उम्मीद

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नई दिल्ली: गुरुवार 4 मार्च को मॉनेटरी पॉलिसी कमेटी (एमपीसी) की बैठक के बाद आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की कमी की है। अब नई रेपो रेट घटकर 6% हो चुकी है। बैठक में शामिल एमपीसी के 6 में से 4 सदस्यों रेपो रेट में कमी का समर्थन किया। बतादे की इससे पहले फरवरी की एमपीसी की बैठक के बाद आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25% की कमी की थी जिसके बाद नई रेपो रेट 6.25% हुई थी।

रेपो रेट के तहत ही आरबीआई बैंकों को लोन देता है। नई रेपो रेट से आम इंसान को थोड़ी राहत मिलेगी। क्यूंकि बैंकों को सस्ता लोन मिलने की वजह से बैंकों अपने ग्राहकों को कम ब्याज दरों पर कर्ज देते है। मौजूदा वित्त वर्ष (2019-20) में जीडीपी ग्रोथ 7.2% रहने की उम्मीद है।

पहली छमाही (अप्रैल-सितंबर) खुदरा महंगाई दर 2.9-3% के बीच रहने का आरबीआई ने अनुमान लगाया है। आरबीआई ने इससे पहले खुदरा महंगाई दर 3.2-3.4% के बीच रहने की बात कही थी। दूसरी छमाही (अक्टूबर-मार्च) में खुदरा महंगाई दर 3.5-3.8% हो सकती है। आरबीआई ब्याज दरें तय करते समय खुदरा महंगाई दर को ध्यान में रखती है।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को आरबीआई द्वारा बनाये गए 12 फरवरी 2018 का सर्कुलर रद्द कर दिया था। इस सर्कुलर में अगर कोई कंपनी द्वारा कर्ज लौटने में एक दिन की भी देरी होती है तो आरबीआई उसे एनपीए में डाल देती है। इसके बाद बैंक को 180 दिन की समय अवधी पूरी होने के बाद 15 दिन के अंदर आईबीसी कोड के तहत कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने की अर्जी डालनी पड़ती थी। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने कहा की, एनपीए के समाधान नियमों का नया सर्कुलर जल्द ही जारी होगा।

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