Rohan Gandotra recalls his experience of shooting for 1962 the war in the hills series

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वेब सीरीज 1962: द वॉर इन द हिल्स में रोहन गंडोत्रा सैनिक करण यादव का किरदार निभा रहे हैं। यह 26 फरवरी, 2021 को डिज्नी प्लस हॉटस्टार वीआईपी पर रिलीज होगी। इस सीरीज की शूटिंग लद्दाख में हुई है। रोहन ने बताया कि उन्हें लद्दाख में शूटिंग के दौरान सांस लेने में बहुत दिक्कत होती थी। ऑक्सीजन लेवल बहुत कम था। कंपकंपा देने वाली ठंड और सैंडस्टोर्म के बीच उन्हें शूट करने में बहुत मुश्किल हुई थी। 

रोहन गंडोत्रा ने कहा, ”मैं लद्दाख पहली बार गया था। मैंने सुना था कि वहां पर लोगों को सांस लेने में दिक्कत होती है। इसलिए मैंने योग और सांस के व्यायाम करके खुद को तैयार किया। लेकिन जब मैं वहां पहुंचा, तो मेरी कोई तैयारी काम नहीं आई। जब हम लद्दाख पहुंचे, तो पहले दिन हम सभी से होटल में आराम करने के लिए कहा गया। दूसरे दिन मेरी नाक से खून निकलने लगा, लेकिन मुझे बताया गया कि यह सामान्य है।”

”फिर हम जब बाहर निकले, तो मैंने देखा कि छोटी-छोटी दुकानों पर ऑक्सीजन बिक रही थी। यह मेरे लिए नया था। हम जब सेट पर पहुंचे, जो हमारे होटल के मुकाबले ज्यादा ऊंचाई पर था, तो हमें कठिन मौसम का सामना करना पड़ा। वहां न केवल सैंडस्टॉर्म आए, बल्कि चिलचिलाती ठंडी हवा ने हम सभी को कंपकंपा दिया। शुरू में यह बहुत चुनौतीपूर्ण लगा, लेकिन फिर धीरे-धीरे हमारा शरीर इन परिस्थितियों का अभ्यस्त हो गया। अंत में टीमवर्क और महेश सर के प्रोत्साहन और सपोर्ट से हम उन मुश्किल परिस्थितियों में भी अपना सर्वश्रेष्ठ अभिनय कर पाए।”

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इस सीरीज में अभय देओल, आकाश थोसर, सुमीत व्यास, रोहन गंडोत्रा, अनूप सोनी, मेयांग चेंग, माही गिल, रोशेल राव, हेमल इंगले आदि मुख्य भूमिका निभा रहे हैं। यह सीरीज लद्दाख के ऊंचे इलाकों और भारत के दूरदराज के गांवों में फिल्माई गई है, जिससे यह देखने में वास्तविक और विश्वसनीय लगती है।

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सच्ची घटनाओं से प्रेरित सीरीज 1962: द वॉर इन द हिल्स उन सैनिकों की कहानी है, जिन्होंने बिल्कुल मामूली हथियारों से लैस होने के बाद भी खुद से बहुत ज्यादा विशाल संख्या में घुसपैठ कर रहे सैनिकों को वहीं रोक दिया। यह सेना के इतिहास की सबसे महान मुठभेड़ों में से एक है। लगभग 60 साल पहले हमारे सैनिकों ने हमारे देश के अभिन्न अंग, लद्दाख की रक्षा के लिए अदम्य साहस एवं बहादुरी का परिचय दिया। यह लड़ाई हम आज तक लड़ रहे हैं। यह 125 सैनिकों की कहानी है, जिन्होंने हिम्मत के साथ 3000 चीनी सैनिकों का सामना किया। इस 10 एपिसोड के वॉर-ड्रामा की कहानी चारुदत्त आचार्य ने लिखी है और इसका निर्देशन महेश मांजरेकर ने किया है। उन्होंने न केवल युद्ध का खूबसूरती से चित्रण किया है, बल्कि सैनिकों के व्यक्तिगत जीवन और देश सेवा के लिए उनका बलिदान भी दिखाया है।



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