देखिए ऐसे भी हैं तब्लीगी जमाती: देशवासियों को दे रहे हैं अपना खून और प्लाज्मा

कोरोना महामारी के चलते तब्लीगी जमात के कुछ हज़ार लोगों के अंधविश्वासों और मूर्खताओं का नतीज़ा हम सभी चुके हैं। जनता का गुस्सा उनके प्रति जायज़ है, लेकिन उनपर कोरोना आतंक या कोरोना जेहाद के आरोप लगाना गलत है। देश के शहरों की सब्जी मंडियों, राशन की दुकानों, सहायता केंद्रों और बैंकों में सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ते हम हर रोज़ देख रहे हैं।

ऐसा करने वालों में हर मज़हब के बेवकूफ लोग शामिल हैं। क्युकी हर कौम में हर तरह के इंसान मौजूद है। उसके लिए किसी एक कौम को टारगेट और अपमानित करना सही नहीं है। यह सिर्फ साम्प्रदायिक मानसिकता है जिसे देश की इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने जन्म दिया है। देश के मौजूदा हालात बता रहे हैं कि तब्लीगियों को अपनी गलती का अहसास है। वे इस बात को समझते है कि अल्लाह भी उन्हीं की मदद करता है जो अपनी मदद करते हैं।

जिसके बाद कोरोना की प्लाज्मा थेरेपी की सफलता की खबरे सुनने के बाद, जमात के लोग जोकि कोरोना संक्रमण से मुक्त हुए हैं उन्होंने देशवासियों के लिए अपना खून और प्लाज्मा देने की पेशकश की है। काफी जमाती अस्पताल जाकर ऐसा कर भी रहे हैं। हमारे देश की यही खूबसूरती है।

लोगो की गलतियों या अंधविश्वासों की आलोचना करना ठीक है, लेकिन हर घटना को सांप्रदायिक रंग देना गलत है। अपने देश पर आए किसी भी संकट का मुक़ाबला हम सभी देशवासियों को मिलकर करना ही होगा। किसी मुसीबत का सांप्रदायिकरण कर हम अपने देश की जड़ें ही कमज़ोर कर रहे होते हैं।

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