50 साल से शब्बीर कर रहे गायो की सेवा, पिता चलाते थे बूचड़खाना, अब राष्ट्रपति ने दिया पद्म श्री पुरस्कार

0
696

नई दिल्ली: गणतंत्र दिवस के मौके पर देश के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने पद्म पुरस्कारों का ऐलान कर चुके है। जिसमे 112 पद्म पुरस्कारों में चार को पद्म विभूषण तो 14 को पद्म भूषण, 94 लोगों को पद्मश्री दिया जायेगा। ये पद्म पुरस्कार उन लोगो को दिया जाता है जो विज्ञान व इंजिनियरिंग, व्यापार, उद्योग, मेडिसिन, साहित्य व शिक्षा, खेल, कला, समाज सेवा, लोक मामलों,सिविल सेवा जैसे क्षेत्र में अच्छे काम किया हो। लेकिन इन सभी के बीच इन पद्म पुरस्कारों में एक ऐसा व्यक्ति भी शामिल है जो बूचड़खाना चलाते-चलाते गौसेवक बन गया।

दरअसल, महाराष्ट्र के बीड जिले में शिरूर कासार तालुका के रहने वाले शब्बीर सैय्यद पहले बूचड़खाना चलाते थे। लेकिन बाद में सब छोड़कर गौसेवक बन गए। इस मौजूदा समय में शब्बीर के पास 165 गाये है। शब्बीर सैय्यद द्वारा सामाजिक कार्य और पशु कल्याण के क्षेत्र में बेहतरीन काम करने के लिए उन्हें पद्मश्री पुरस्कार देने की घोषणा की गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शब्बीर ने बताया की उनके पिता पहले बूचड़खाना चलाते थे। एक दिन अचनाक मन में ठान लिया की यह काम बंद करना है। फिर शब्बीर ने आगे बताया की उन्होंने गाय की सेवा करना शुरू कर दिया। आज उनके पास 165 गाये है। गाय का गोबर बेंचकर वो अपना खर्चा निकालते है। ध्यान देने वाली बात ये है की शब्बीर न तो दूध बेंचते हैं और न ही गाय, बैल बेचते है तो वो भी किसान के हाथो, वो भी पूरी लिखा पढ़ी के साथ,

शब्बीर बताते है की उनके पिता ने 2 गाये रखना शुरू किया था जिसके बाद शब्बीर ने 70 के दशक में 10 गायों को खुद खरीदकर गायो की सेवा करनी शुरू की थी। बता दें कि जनसत्ता के अनुसार इस बार पद्म सम्मान पाने वालों में 21 महिलाएं, एक ट्रांसजेंडर और 11 विदेश से सम्बद्ध लोग शामिल हैं।

Loading...