शाहिद की शहादत गरिमा के साथ जीने के अधिकार के लिए थी- रिहाई मंच

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लखनऊ, 9 फरवरी 2019. बेगुनाहों की आजादी के लिए लड़ते हुए मारे गए एडवोकेट शाहिद आजमी की नौवीं बरसी पर संविधान और सामाजिक न्याय पर बढ़ते हमलों के ख़िलाफ़ रविवार 10 फरवरी को कैफ़ी आजमी एकेडमी, लखनऊ में 11 बजे से प्रदेश के जनांदोलनों के नेताओं का जमावड़ा लगेगा. इसका आयोजन रिहाई मंच कर रहा है.

रिहाई मंच अध्यक्ष मोहम्मद शुऐब ने कहा कि जिस दौर में एक समुदाय पर आतंकवाद का ठप्पा लगाए जाने का सिलसिला तेज हुआ, खुद उसका शिकार होने के बावजूद एडवोकेट शाहिद आजमी ने आतंकवाद के नाम पर बेगुनाहों को फंसाए जाने के ख़िलाफ़ कोर्ट में आवाज बुलंद करने की ठानी. उसकी लड़ाई किसी एक समुदाय की लड़ाई नहीं थी. उसकी लड़ाई उस सामाजिक न्याय के लिए थी जिसमें वंचित समाज को गरिमा के साथ जीने का अधिकार मिल सके, कोई बेगुनाह फर्जी मुठभेड़ का शिकार न बने या जेलों में सड़ने को मजबूर न हो. चाहे वो मोदी की पटना रैली में हुआ पटाखा विस्फोट हो या फिर आईएस से संबंध जोड़ने के लिए अमरोहा में ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक पंप को राकेट लांचर बताया जाता हो, ऐसे तमाशों की सच्चाई को जनता ने उजागर कर दिया. लेकिन सवाल खुद को सेकुलर कहते नहीं अघाते उन राजनेताओं से है जो कितने ही शाहिदों की शहादतों से तनिक भी विचलित नहीं होते, अपनी जुबान नहीं खोलते.

मोहम्मद शुऐब ने कहा कि दर्जनभर आपराधिक मामलों के आरोपी सूबे के मुखिया ने अपराधियों के सफाए के नाम पर जिन जातियों को कथित मुठभेड़ का निशाना बनाया, उसी मनुवादी मानसिकता के तहत ब्रिटिश हुकूमत ने भी उन्हें आपराधिक करार दिया था. सवर्ण आरक्षण हो या 13 प्वाइंट रोस्टर, उसकी आड़ में दरअसल मनुवादी व्यवस्था को लागू किये जाने की मंशा है. इसका सिरा भीमा कोरेगांव मामले तक जाता है जिसमें जनता के पक्ष में खड़े बुद्धिजीवी और सामाजिक कार्यकर्ता देश के दुश्मन की तरह पेश कर दिए जाते हैं. बाबा साहब भीमराव अंबेडकर के परिवार से जुड़े आनंद तेलतुंबड़े को जेल भेजने की तैयारी है. सच बोलने के अपराध में सुधा भारद्वाज, स्टेन स्वामी, गौतम नौवलखा, वरवर राव आदि तमाम सामाजिक कार्यकर्ताओं पर कानूनी शिकंजा है. हक़-हुकूक की आवाजों को देशद्रोह से जोड़नेवाली सरकार खुद देश के लिए खतरा बन चुकी है.

इस जमावड़े के बारे में रिहाई मंच नेता सचेंदर यादव ने बताया कि बीएचयू, एएमयू, बीबीएयू, इलाहबाद विश्वविद्यालय, लखनऊ विश्वविद्यालय समेत 2 अप्रैल को हुए भारत बंद के उन तमाम क्षेत्रों से सामाजिक न्याय के लिए संघर्षशील साथी शामिल होंगे. शामिल होने वालों में प्रमुख रूप से एसआर दारापुरी (पूर्व आईजी), अजय प्रकाश (संपादक जन ज्वार), मनोज सिंह (वरिष्ठ पत्रकार), विनय जायसवाल (स्तम्भकार), एएमयू के छात्र नेता अहमद मुजतबा फराज और मो0 आरिफ, बीबीएचयू के छात्र नेता रणधीर यादव, शिवदास और कुलदीप मीना, गोरखनाथ यादव (सामाजिक न्याय मोर्चा, यूपी), रिंकू यादव (सामाजिक न्याय मोर्चा, बिहार), सुनील राव (भीम आर्मी), इं0 हरिकेष्वर राम (अबसब), वीरेन्द्र कुमार (छात्र नेता जेएनयू, झारखण्ड जनतांत्रिक महासभा), राम लाल (पूर्व विधायक), मोहम्मद सलीम (इंसाफ मंच), मुजाहिद नफीस (माइनॉरिटी कोर्डिनेशन कमेटी गुजरात), संजीव (सत्य शोधक संघ), प्रो.मंजूर अली, प्रो0 राजेन्द्र वर्मा, प्रो0 राजेश्वर यादव, शिवकुमार यादव (यादव सेना), प्रो0 छबी लाल (अरबी फारसी यूनिवर्सिटी), सुधाकर पुष्कर (बीबीएयू), नीरज पटेल (सम्पादक जनमत), सूरज बौद्ध (भारतीय मूल निवासी संगठन), राजीव ध्यानी (स्वराज अभियान), बलवंत यादव, अखिलेश यादव, बृजेश यादव (दलित-मुस्लिम अधिकार मंच), डाक्टर मजहर, पिछड़ा समाज महासभा के शिवनारायण कुशवाहा, रिहाई मंच आजामगढ़ से शाह आलम शेरवानी, तारिक शफीक, अवधेश यादव, पसमांदा मुस्लिम महाज की नाहिद अकील, जाकिर अली त्यागी, उमेश कुमार गौतम (डॉ अम्बेडकर निशुल्क शिक्षण संस्थान), विशाल भारती (द्रष्टि बाधित विद्यालय समिति), मुन्ना कुमार (भारतबंद के आन्दोलनकारी), इनामुल (इंटीग्रल यूनिवर्सिटी) होंगे.

द्वारा-
राबिन वर्मा
(रिहाई मंच)

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