रिसर्च में कोरोना को लेकर चौकाने वाला खुलासा, ज़िंदा नहीं बल्कि प्रोटीन मॉलीक्यूल है कोरोना वायरस

चीन के वुहान शहर से फैले कोरोनावायरस ने पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले चुका है। इससे निजात पाने के लिए कई देश के वैज्ञानिक इसकी दवा और टीका बनाने के लिए रात दिन एक कर चुके हैं। हालाँकि कि 3 महीने से ज्यादा समय गुजर जाने के बाद भी इस संक्रमण की अभी तक कोई दवा नहीं बनाई जा सकी है।

लेकिन कई शोधों में कोरोना वायरस को लेकर चौकाने वाले खुलासे हुए हैं। पता चला है कि कोरोना वायरस कोई जिंदा जीव नहीं है बल्कि एक तरह का प्रोटीन मॉलिक्यूल मतलब डीएनए हैं। यह लिपिड (फैट या वसा) की परत से पूरी तरह घिरा हुआ है। जब यह वायरस आंख, नाक या बुक्कल म्यूकोसा सेल द्वारा सोखा जाता है तो यह अपने आप जेनेटिक कोड को बदलकर भ्रामक और मल्टिप्लाई सेल्स में तब्दील हो जाता है।

मानव शरीर में पहुंचते ही कोरोना वायरस खुद को तेजी से बड़ी संख्या में बढ़ाने लगता है। क्योंकि यह कोई जिंदा जीव नहीं बल्कि एक प्रोटीन मॉलिक्यूल है इसलिए यह मरता भी नहीं है बल्कि इसके बढ़ने की संभावना नहीं होती वह खुद ही अपने आप मर जाता है। कोरोना खत्म होने की वजह समय, तापमान ह्यूमिडिटी वगैरा से होता है।

कोरोना वायरस को जो ज्यादा देर तक बचाए रहती है वह इसकी पतली बाहरी परत जिसे फैट भी कह सकते हैं। इस परत को सबसे आसान तरीका साबुन या डिटर्जेंट्स से नष्ट किया जा सकता है। क्योंकि साबुन या डिटर्जेंट किसी भी फैटी लीवर को काटने में सबसे कारगर साबित होता है। इसलिए सभी लोगों से कहा जाता है कि अपने हाथों को साबुन या डिटर्जेंट्स लगाकर कम से कम 20 सेकंड तक धुलना चाहिए।

अभी हाल ही में जॉन होपकिंस यूनिवर्सिटी ने भी कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए कुछ जरूरी चीजें शेयर की थी जो सभी के लिए जाना बेहद जरूरी है। रिसर्च में सामने आए नतीजों के आधार पर कोरोना से बचने के उपाय भी ऊपर बताए गए हैं।

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