लखनऊ में लाठी खाते नौजवान और लोकतंत्र के कुछ सवाल- रविश कुमार

लखनऊ से कई नौजवान की लाठी से घायल अपने साथियों की तस्वीरें भेज रहे हैं। यह ख़बर कई जगह छपी है। किस रूप में छपी है यह तो लाठी खाने वाले नौजवान ही बता सकते हैं। लोकतंत्र में अपने प्रति और दूसरों के प्रति लापरवाह होने का यह सब नतीजा है। जो लोग पढ़ रहे हैं उनके भीतर लाठी खाने वालों के प्रति कोई सहानुभूति नहीं होगी और जो लाठी खा रहे हैं उनके भीतर भी किसी दूसरे समूह के लाठी खाने पर सहानुभूति नहीं होगी। यह स्थिति नागरिकों को बेबस करती है। नागरिक खुद को भी बेबस करते हैं।

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