कोरोना से बेटे की हुयी मौत, बेटे का अंतिम संस्कार करने गया पिता, चेहरे से कफन हटाते ही भाग खड़े हुए लोग

कोरोनावायरस संकट के बीच यूपी के संतकबीर नगर में एक अस्पताल की बड़ी लापरवाही सामने आई है। मिली जानकारी के अनुसार बस्ती के कैली अस्पताल ने एक व्यक्ति को फोन कर बताया कि उसके 25 साल के बेटे की कोरोनावायरस से मौत हो गई है। बेटे के मरने की खबर सुनते ही घर में हड़कंप मच गया परिवार वालों का रो रो कर बुरा हाल हो गया।

अस्पताल ने मंगलवार की सुबह एंबुलेंस से बेटे का शव भेजा। जब पुलिस की मौजूदगी में शव को घाट पर अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया। तब पिता को जवान बेटे का चेहरा दिखाए गया। लेकिन उस वक्त जो हुआ उसे सबके होश उड़ गए। क्योंकि पिता ने बताया कि यह उसके बेटे का शव नहीं है।

मीडिया में छपी खबर के अनुसार, कैली अस्पताल ने जिंदा कोविड-19 मरीज को मरा साबित कर उसके परिवार वालों को गलत सूचना दी। सूचना गलत देने के साथ-साथ परिवार वालों को शव एंबुलेंस से घर भी भेज दिया। जब कुआनो नदी के मुखलिसपुर घाट पर शव को अंतिम संस्कार के लिए पुलिस की मौजूदगी में ले जाया गया। तो पिता ने चेहरा देखकर बेटे के शव होने से इनकार किया। जब मामला खुला तो पता चला कि यह शव धर्मसिंहवा के महादेवा नानकार के निवासी 47 साल कोविड-19 मरीज का पाया गया। जिसकी सोमवार रात ही कैरी अस्पताल में मौत हो गई थी।

वही इस अस्पताल की बड़ी चूक पर जिलाधिकारी रवीश गुप्ता ने बताया कि महुली इलाके के मथुरापुर गांव का 25 साल का युवक बस्ती के कैरी अस्पताल में कमरा नंबर 229 के बेड नंबर 5 पर भर्ती है जो जिंदा है। जिस शख्स की मौत हुई है वह धर्मसिंहवा के महादेवा नानकार का निवासी है उन्होंने बताया कि गलत सूचना परिवार को दे दी गई थी। अभी तक मथुरापुर गांव के युवक की कोरोना रिपोर्ट नहीं आयी है और मरने वाले व्यक्ति की कोविड-19 के प्रोटोकॉल के तहत अंतिम संस्कार होगा। वही इस चूक पर जांच कराई जाएगी।

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