अनधिकृत तरीके से बनी बावखलेश्वर मंदिर को सुप्रीम कोर्ट ने दिया तोड़ने का आदेश

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गैरकानूनी तरीके से महाराष्ट्र के नवी मुंबई में बनी प्रसिद्ध बावखलेश्वर मंदिर को सुप्रीम कोर्ट ने गिराने का आदेश दे दिया है। जिसके बाद अधिकारियों ने भी सुप्रीम कोर्ट का आदेश मानते हुए मंदिर को तोड़ने का आदेश दे दिया है। इससे पहले बॉम्बे हाई कोर्ट भी मंदिर और अन्य अतिक्रमण को गिराने के आदेश दे चुकी है।

यह अनधिकृत मंदिर महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलमेंट कॉपरेशन (MIDC) की जमीन पर बनी है। साल 2013 में वाशी के संदीप ठाकुर नामक सामाजिक कार्यकर्ता ने मंदिर ट्रस्ट के खिलाफ एक जनहित याचिका दायर की थी। दायर जनहित याचिका में कोहराम के अनुसार यह आरोप लगाया गया था कि ट्रस्टी और NCP नेता गणेश नाइट के रिश्तेदार संतोष टंडेल ने गैरकानूनी तरीके से तीन मंदिर बनवाए हैं।

दायर जनहित याचिका में दावा किया गया था कि इन अवैध निर्माण की वजह से महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलमेंट कॉपरेशन (MIDC) की 1.4 लाख स्क्वायर मीटर जमीन पर अतिक्रमण है। अदालत के आदेश पर एक अधिकारी का कहना है की चूंकि सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी है, इसलिए हमें मंदिर को गिराने के सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करना होगा। मंदिर को गिराने के लिए आदेश दे दिए गए हैं।

बावखलेश्वर मंदिर ट्रस्ट ने साल 2013 के बॉम्बे हाई कोर्ट के आदेश जिसमें सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने का आदेश दिया गया था को चुनौती देते हुये सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी जिसे बीते हफ्ते ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को खारिज किया है। वही इस आदेश पर एक अन्य अधिकारी ने बताया कि, इस अतिक्रमण को हटाने के लिए भारी पुलिस बल की जरूरत पड़ेगी।

मंदिर के अलावा वे निर्माण भी अतिक्रमण वाले क्षेत्र में आते हैं, जिन्हें सौंदर्यीकरण के नाम पर बनाए गए हैं। वही मंदिर के ट्रस्ट ने सरकार से अपील की थी कि वे इन अनधिकृत बने निर्माण को कानूनी मान्यता दे दें। वही ट्रस्ट दावा कर रही है कि मंदिर 2009 के पहले बना है।

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