तरन्नुम सड़क किनारे बनाती है पंचर, बेटी को पढ़ा लिखाकर बनाएंगी अफसर

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सपने वही देखते है जिनके हौसले बुलंद होते है। इसी की जीती जगती मिशाल है तरन्नुम, तरन्नुम पिछले 20 साल से दिल्ली में कार, बाईक, साइकिल और रिक्शा के पंचर बनाकर अपने घर का खर्च चलाती है।

तरन्नुम (37) ने बताया की वह अपने पति के साथ पहले दिल्ली के जानकीपुरम एक्सटेंशन के मुलायम तिराहे के पास पंचर बनाती थी। वह इस काम में अपने पति का हाथ बटाती थी। कुछ दिनों में उन्होंने पंचर बनाना सिख लिया। अब वह खुद अकेले पंचर बनाती है तरन्नुम पंचर के नाम से उनकी दुकान चर्चित हो गयी है।

अब तरन्नुम के पति कोई दूसरा काम करते है परिवार में दोनों के कमाने से इनकम ठीक-ठाक हो जाती है। उनके दो लड़के और एक लड़की है वह चाहती है की उनके बच्चो की अच्छी परवरिश हो। वही तरन्नुम का ख्वाब है की वो अपने बच्चो को पढ़ाकर अफसर बनाए।

तरन्नुम बताती है की एक दिन में 300 से 400 रुपए कमा लेती हैं। इससे उनके घर का खर्च चलता है और पति की कमाई बच्चो की पढ़ाई लिखाई में खर्च होती है। तरन्नुम कहती है कभी-कभी तो वह रात के 12 बजे तक दुकान पर पंचर बनाती है। उन्हें किसी चीज से डर नहीं लगता है। तरन्नुम का मानना है की ऐसा कोई काम नहीं है, जो सिर्फ महिलाएं कर सकती हैं।

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