BJP ने चुनाव आयोग को लिखी चिट्ठी, चुनाव को लेकर दिल्ली की मस्जिदों में हो विशेष पर्यवेक्षक की तैनाती

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नई दिल्ली: लोकसभा चुनाव 2019 को लेकर बीजेपी ने चुनाव आयोग को पत्र लिखकर दिल्ली की मस्जिदों में विशेष पर्यवेक्षक तैनात करने की अपील की है। चुनाव आयोग से बीजेपी ने लिखे अपने पत्र में कहा की खासकर मुस्लिम बहुल इलाके के मस्जिदों में पर्यवेक्षक की तैनातीहो ताकि राजनीतिक पार्टी के नेता या धार्मिक नेता चुनाव को प्रभावित करने के लिए लोगों के बीच नफरत न फैला सकें।

बीजेपी द्वारा लिखी अपनी चिट्ठी में कहा की, “हम इस शिकायत को आप तक लिखने के लिए बाध्य हुए हैं क्योंकि पिछले कुछ समय में ऐसी कुछ घटनाएं हुई है जिसमें आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल तथा उनके सदस्यों ने जाति और धर्म के आधार पर वोटों के ध्रुवीकरण की कोशिश की। यह सब की जानकारी में है कि अल्पसंख्यकों को भड़काने वाले अपने बयान की वजह से अरविंद केजरीवाल कुछ समय पहले विवादों में थे। मुस्लिम बहुल इलाके में वोटों का ध्रुवीकरण करने के लिए केजरीवाल ने कई आधारहीन और भड़काउ बयान दे रहे हैं।”

इसके अलावा बीजेपी ने अपने पत्र में आप के मुखिया केजरीवाल के कई ट्वीट्स का भी उल्लेख किया है इसमें एक ट्वीट है, “विवेक तिवारी तो हिंदू था? फिर उसको इन्होंने क्यों मारा?” वही केजरीवाल का एक यूट्यूब वीडियो का लिंक शेयर करते हुए बीजेपी ने लिखा की, “एक अन्य घटना में दिल्ली के बदरपुर में अरविंद केजरीवाल ने मुस्लिम समुदाय के लोगों की भावनाओं को उत्तेजित करने वाला बयान दिया।” एक अन्य वीडियो का लिंक शेयर करते हुए भाजपा ने लिखा, “दिल्ली के जामा मस्जिद में बयान भाषण के दौरान चुनाव के मकसद से केजरीवाल लोगों को जाति और धर्म के नाम पर भड़का रहे हैं।”

अपने पत्र में आगे लिखा, “आम आदमी पार्टी के अन्य सदस्य भी हमेशा भड़काउ बयान देते रहते हैं। हाल ही में अमानतुल्लाह खान एक ऐसा ही बयान देते हुए कहा था कि मुस्लिम समुदाय के लोग वर्ष 2019 के आम चुनाव में वोट नहीं दे सकेंगे क्योंकि वोटिंग का समय रमजान के महीने में पड़ रहा है। इन सभी स्थितियों को देखते हुए ऐसी संभावना है कि अरविंद केजरीवाल और उनके सहयोगी धर्म के नाम पर मुस्लिम वोट का ध्रुवीकरण कर सकते हैं।”

आगे लिखा, “कई बार ऐसा हुआ है कि मस्जिद के समीप जहां अल्पसंख्यक समुदाय के लोग शुक्रवार की नमाज अता करने जाते हैं, वहां भड़काउ भाषण दिए जाते हैं। निर्दोष लोगों को साफ्ट टारगेट बनाया जाता है। रमजान के महीने में इस बात की ज्यादा संभावना है कि मुस्लिम और अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के बीच धर्म के आधार पर राजनीति की जा सकती है। उन्हें भड़काया जा सकता है। धार्मिक आधार पर भड़काने और वोटों के ध्रुवीकरण वाले बयान अक्सर पर्दे के पीछे दिए जाते हैं, इस वजह से कोई इनपर ध्यान नहीं देता है और न हीं इसकी निगरानी होती है।”

चुनाव आयोग से पत्र लिखकर बीजेपी ने मुस्लिम बहुल इलाकों की मस्जिदों में विशेष पर्यवेक्षकों की नियुक्ति का आग्रह किया है जिसमे कोई भी राजनीतिक दल के नेता या धार्मिक नेता चुनाव को प्रभावित करने के लिए लोगों के बीच नफरत न फैला सकें तथा आचार संहिता का उल्लंघन न कर सकें।

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