शरीर इस कदर सुख गया है कि, मात्र हड्डियों का ढांचा भर रह गया..

दुनिया के हर माँ बाप की जान उनके बच्चो में बसी होती है, बच्चो को अगर खरोंच भी लग जाये जाए तो माँ और बाप के लिए परेशानी बन जाती है। लेकिन उन माँ बाप किया बीतेगी जिनका बच्चा बिस्तर पर लेट कर ज़िंदगी और मौत से लड़ रहा हो..
आज हम आपको एक मामला बताने जा रहे हैं, जिसको सुनकर आपका भी मन भर आएगा। मामला राजिस्थान के कोटा का है, जहाँ एक साथ साल का बच्चा कैंसर नामक बीमारी का बुरी तरह शिकार है, जिसके चलते उस बच्चे का शरीर इस कदर सुख गया है कि, मात्र हड्डियों का ढांचा भर रह गया है। उसकी हालत देख दिनभर माँ बस रोटी रहती और भगवन से दुआ करती है।

बच्चे के पिता का नाम ओमकार है जो कि हर रोज़ मेहनत मजदूरी करके बस 100 रुपए कमा पाते हैं, जयपुर के मनिपाल अस्पताल में उनके 7 साल के बेटे अमित प्रजापति के कैंसर का इलाज हो रहा है। अमित प्रजापति के पिता ओमकार अपने बेटे का इलाज बस अपनी गरीबी की वजह से नहीं करा प् रहे हैं। लेकिन अपने बच्चे के लिए माँ बाप किया कुछ नहीं करते ओमकार ने कुछ पैसे को इंतेज़ाम इधर उधर से कर अपने बेटे को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती करवा चुके हैं। उस बीमार बच्चे के पिता का कहना है कि, “अपने बेटे को हड्डियों का ढांचा होते, तिल-तिल मरते देखना किसे पसंद होगा। उसके शरीर से चिपके हाथों को देखो, कोई भी उसकी पसलियों तक को गिन सकता है, उसे ब्लड कैंसर है और मौत से लड़ रहा है। यहां तक ​​कि जो दवाइयां उसे दी जा रही उनका भी उस पर कोई असर नहीं हो रहा।”

साथ साल मासूम को उसकी बीमारी की वजह से पेट और सर में तेज़ दर्द होता है, साथ ही बुखार से उसका पूरा बदन जलने लगता है। डॉ़क्टर अनुसार अमित की कीमोथेरेपी जल्दी ही शुरू करनी होगी। जिसका खर्च करीब 12 लाख रुपए होगा करीबी से तंग माँ बाप ने तीन महीने में कुछ पैसों ही जमा किए हैं, उस मासूम की मां का नाम सरोज है। जो अपने बेटे को दर्द से तड़पते देख फुट फुट कर रोने लगती है, पेट दर्द के कारण मासूम बच्चे के मसूढ़ों से खून निकलने लगता है जिसे देख माँ का भी कलेजा फटने लगता है उसको लगता हैं कि कब किस वक्त वो उसे खो सकती है।

मैं रोजाना 300-400 रुपये कमाने लायक मजदूरी करता हूं। बेटे का इलाज करवाने के लिए मजदूरी भी छूट गई है। “हर बार जब हम डॉक्टर के पास टेस्ट और दवाइयों के लिए आते हैं तो छह से सात हजार रुपये का खर्च आता है। मेरे पास जो भी पैसा था, मैंने खर्च कर दिया, मुझे नहीं पता कि अब मुझे क्या करना है। मैं सिर्फ एक मजदूर हूं … 12 लाख रुपये मैं कहां से लाउंगा? ”

मां ने बताया कि, जो बेटा हमेशा बाहर खेलता रहता था, मेरे लाख डांटने के बाद घर लौटता था आज वो महीनों से बिस्तर पर पड़ा है। अब मैं चाहती हूं कि वो बाहर जाकर खेले लेकिन उसे सिर्फ दर्द से तड़पते देखती हूं। मां-बाप अपने इकलौते बच्चे को अपनी आंखों के सामने नहीं मरते देख सकते इसलिए वह दुनिया भर में लोगों से मदद मांग रहे हैं। कई एनजीओ और लोगों से उन्होंने डोनेशन की मांग की ताकि वह अपने बच्चे को बचा सके।

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