Tajmahal के रख-रखाव को लेकर योगी सरकार को SC ने लगाई फटकार, 28 दिनों में मांगा विजन डॉक्यूमेंट

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photo credit: jansatta

नई दिल्ली: विश्व ऐतिहासिक धरोहर में शामिल ताजमहल का सही से रख-रखाव न करने पर भारतीय जनता पार्टी वाली योगी सरकार को सुप्रीम कोर्ट ने जमकर फटकार लगाई है। 13 फरवरी, 2019 दिन बुधवार को दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए योगी सरकार से 28 दिनों के अंदर नया विजन डॉक्यूमेंट दाखिल करने के लिए कहा है। जिसमे यूपी सरकार को बताना होगा की आने वाले समय में ताज के रख-रखाव के लिए क्या कदम उठाएगी।

सुप्रीम कोर्ट ने दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए कहा, “हम ताज को लेकर चिंतित हैं। हम सरकार की किसी गतिविधि का विरोध नहीं करते, मगर हम जगह को लेकर परेशान हैं। विजन डॉक्यूमेंट के बगैर हम, आपकी किसी और याचिका पर सुनवाई नहीं करेंगे। बिना उसके मामले पर कैसे सुनवाई करें? डॉक्यूमेंट के बाद ही सुनवाई होगी।”

साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार से ताज के प्रोटेक्शन पर दो महीने के अंदर अंतरिम रिपोर्ट कोर्ट के पास दाखिल करने के लिए कहा है। साथ ही कोर्ट को ये भी बताए कि आगरा को ऐतिहासिक शहर (हेरिटेज सिटी) का तमगा दिया जा सकता है या नहीं?

इससे पहले भी ताज के रख-रखाव को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार तथा ताज ट्रैपेजियम जोन (टीटीजेड) प्राधिकरण को फटकार लगाई थी। तब कोर्ट ने कहा था की, “सोचिए तब क्या होगा, जब यूनाइटेड नेशंस एजुकेश्नल, साइंटिफिक एंड कल्चरल ऑर्गनाइजेशन (युनेस्को) ताज को दिया गया विश्व ऐतिहासिक धरोहर (वर्ल्ड हेरिटेज साइट) का टैग वापस ले लेगा?”

लगभग 10,400 स्क्वैर फुट वाला यह इलाका यूपी के राजस्थान के भरतपुर जिले से लेकर आगरा, फिरोजाबाद, मथुरा, हाथरस और इटा तक फैला है। जिसको लेकर सुप्रीम कोर्ट खुद समय-समय पर इस इलाकों के संरक्षण को संवारने और बचाने को लेकर उठाए जा रहे कदमों पर जानकारी लेती रही है। इसी बीच ताज की सुरक्षा, प्रोटेक्शन और ताज ट्रैपेजियम जोन में पर्यावरण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मार्च 2018 में विजन डॉक्यूमेंट दाखिल करने के लिए कहा था। बता दें कि ताजमहल को 1631 में मुगल बादशाह ने अपनी पत्नी मुम्ताज की याद में बनवाया था।

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