सूचना अधिकारी कर्मेश प्रताप सिंह की पहल पर गांव में दौड़ी विकास की पहिया

बस्ती। ग्राम पंचायतों के विकास के लिए सरकार अच्छा खासा धन उपलब्ध कराती है।बावजूद उसके गांव का विकास समुचित ढंग से नहीं हो पाता है।गांव के विकास के लिए जनता हर पांचवें साल प्रधान को चुनती है।मगर विकास के दावे खोखले साबित हो जाते हैं। लेकिन जब गांव का कोई व्यक्ति स्वयं विकास के लिए आगे आता है तो निश्चय ही उसकी प्रशंसा होती है।

कुछ ऐसा ही कर दिखाया बभगांवा खुर्द गांव निवासी कर्मेश प्रताप सिंह वर्तमान समय में विधानसभा में सूचनाधिकारी पद पर तैनात हैं।उन्होंने अपने गांव के विकास के लिए पहल की तो गांव में विकास के पहिए दौड़ने लगे।जिसका लाभ गांव की जनता को मिल रहा है।सूचनाधिकारी ने बताया कि आजादी के बाद जिस तरह से विकास की गति को रफ्तार मिलना था।उस मायने में गांव उपेक्षा का दंश झेलता रहा। 

स्थानीय जनप्रतिनिधि गांव के विकास में रुचि नहीं ली। जिसके चलते ग्रामीणों को बरसात के समय में कीचड़ भरे गंदे पानी से होकर आना जाना मजबूरी था।यही नहीं बिजली न होने से मुश्किलों का सामना करना पड़ता था।पढ़ने-लिखने वाले बच्चों को ढिबरी की रोशनी में पढ़ाई करनी पड़ती थी। अपनी जन्मभूमि की माटी से गहरा नाता रखने वाले कर्मेश प्रताप सिंह ने  गांव के विकास के लिए पहल शुरू की तो रोशनी की किरण से गांव जगमग हो गया।

यही नहीं प्रधानमंत्री सड़क योजना अंतर्गत गांव को पिच सड़क से जोड़ा पूर्व की सपा सरकार में जनेश्वर मिश्र योजना अंतर्गत गांव में एक किलोमीटर आरसीसी सड़क निर्माण कराकर रिंग रोड मॉडल जैसी सुविधाएं मुहैया कराई।शुद्ध पेयजल के लिए अधिकांश घरों में इंडिया मार्का हैंडपंप लगवाए।गांव में लाइब्रेरी की स्थापना,खेलकूद के लिए स्टेडियम व बच्चों के लिए हाई स्कूल तक की शिक्षा सुलभ कराना पहली प्राथमिकता है।इसके लिए शासन स्तर पर पत्राचार भी किए जा रहे हैं।कर्मेश प्रताप सिंह उत्कृष्ट कार्य के लिए कई बार सम्मानित भी हो चुके हैं।उन्होंने बताया कि शहर जैसी सुविधाएं गांव में विकसित करने के लिए कई विभाग के मंत्रियों को पत्र दिया गया है।बजट स्वीकृत होते ही कई अन्य सुविधाएं गांव में उपलब्ध कराई जाएंगी।गांव में विकास कार्यों को गति देने के लिए ग्रामीण इनकी प्रशंसा भी कर रहे हैं।

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