पत्नी ने अचार के लिए बनाया था थोड़ा सा सिरका, फिर पति का घुमा दिमाग तो खड़ा कर दिया लाखों का कारोबार

कभी कभी आदमी कुछ न करके बहुत कुछ हासिल कर लेता है, कहते हैं किसकी किस्मत कब बदल जाये इस बात की जानकारी किसी को नहीं है। चलिए बताते हैं आपको एक ऐसा ही किस्सा। मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर मांचा गांव में रहने वाली शकुंतला देवी पढ़ने के लिए न तो कभी स्कूल गई ना ही कोई ऐसी ट्रेनिंग ली जिससे बिजनेस किया जा सके।

लेकिन वो जो हुनर के साथ सिरका बनाती थीं उसने एक कारोबार को जन्म दे दिया है। शकंतुला के पति सभापति शुक्ल (61 वर्ष) न सिर्फ अच्छा कारोबार करते हैं बल्कि कई जिलों में उनका नाम चलने लगा है।

हुआ कुछ यूं था कि “गन्ने का रस बच गया था तो 15-15 लीटर के दो डिब्बों में भरकर रख दिया था। कुछ तो रिश्तेदारों में बांट दिया, कुछ बाजार बेचने को भेज दिया। उस समय डेढ़ दो सौ रुपए का बिका था तभी से उन्होंने ये काम करना शुरू कर कुछ दिया।” ये कहना है शकुंतला देवी (56 वर्ष) का। उन्होंने आगे बताया कि, “हमें भी नहीं पता था कि हमारे घर में बनने वाली चीज को इतने लोग पसंद करेंगे।

लेकिन अब पूरा परिवार मिलकर काम करता है, साथ में 10-12 मजदूर भी रहते हैं। फिर भी काम खत्म नहीं होता है।” सभापति शुक्ल अपने सिरका के बिजनेस का पूरा श्रेय अपनी पत्नी को देते हैं। गांव कनेक्शन संवादाता को ये फोन पर बताते हैं, “न मेरी पत्नी घर पर सिरका बनाती और न मुझे इसका बिजनेस करने का विचार आता। मैं पहले गुड़ बनाता था, उसी समय कुछ गन्ने का रस बच गया तो इन्होंने उसका सिरका बना दिया। पत्नी के कहने पर ही मैं बाजार बेचने गया था।”

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